रांची । झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता महेश तिवारी को फिलहाल निचली अदालत से मिली सजा पर कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को रांची सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत में उनकी अपील पर सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तिथि निर्धारित की है।
अदालत में जोरदार बहस
सुनवाई के दौरान महेश तिवारी के पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली:
बचाव पक्ष की दलील: महेश तिवारी के अधिवक्ता ने विभिन्न कानूनी दृष्टांतों (Precedents) का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की।
अभियोजन का विरोध: अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा ने सजा पर रोक लगाने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट का फैसला तथ्यों पर आधारित है और इसमें किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में राहत नहीं दी जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद करीब 14 साल पुराना है, जो अब अपने कानूनी अंजाम तक पहुँच रहा है:
हाईकोर्ट परिसर में विवाद: 1 मई 2012 को झारखंड हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ता महेश तिवारी और महिला अधिवक्ता ऋतु कुमार के बीच विवाद हुआ था। आरोप था कि महेश तिवारी ने ऋतु कुमार के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया।
ट्रायल कोर्ट का फैसला: हाल ही में न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने महेश तिवारी को दोषी पाते हुए दो साल की कैद और 19,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
काउंटर केस में ऋतु कुमार बरी: महेश तिवारी ने भी ऋतु कुमार के खिलाफ क्रॉस केस दर्ज कराया था, लेकिन साक्ष्य के अभाव में अदालत ने ऋतु कुमार को बरी कर दिया है।
इस मामले में डोरंडा थाना में दो प्राथमिकी (कांड संख्या 191/2012 और 192/2012) दर्ज की गई थीं। अब कानूनी गलियारों की निगाहें 16 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

