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Friday, August 21, 2026

स्वर्णरेखा किनारे अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, तीन मकान जमींदोज

पूर्वी सिंहभूम। मानगो के कुंवर बस्ती इलाके में शुक्रवार को स्वर्णरेखा नदी किनारे अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन की टीम ने तीन मकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान अपने आशियाने को टूटता देख पीड़ित परिवारों के सदस्य भावुक होकर हाथ जोड़कर रोते रहे और अधिकारियों से घर बचाने की गुहार लगाते रहे। हालांकि, प्रशासन ने कार्रवाई नहीं रोकी और देखते ही देखते तीनों मकान मलबे में तब्दील हो गए।

पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई

अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती के बीच जेसीबी मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू होते ही प्रभावित परिवारों में अफरातफरी मच गई। पीड़ित लोग अधिकारियों से कार्रवाई रोकने की अपील करते रहे। घर बचाने के लिए वे हाथ जोड़कर लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन की टीम अपने फैसले पर कायम रही। कार्रवाई के दौरान स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे। पीड़ितों और स्थानीय लोगों को टूटते मकानों के पास जाने से रोक दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने लोगों को पीछे रखने के लिए लाठी के बल का इस्तेमाल किया, जिससे मौके पर तनाव और बढ़ गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में लोग अपने ही घरों को अपनी आंखों के सामने टूटते देखते रहे।

अंचलाधिकारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित मकान मालिकों को पूर्व में नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने के बाद प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि स्वर्णरेखा नदी के किनारे अवैध निर्माण नदी क्षेत्र के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं और नदी की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है।

इधर, मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवारों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखी गई। स्थानीय निवासियों का दावा है कि स्वर्णरेखा नदी के किनारे कई बड़े भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी लंबे समय से बने हुए हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन का उद्देश्य है तो बड़े और प्रभावशाली लोगों के कथित अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

स्थानीय लोगों ने पूरे मानगो क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी के किनारे बने सभी निर्माणों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही कार्रवाई की जद में आए परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई है।

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