32 C
Kolkata
Tuesday, August 18, 2026

भारत में हर वर्ष पांच लाख से अधिक सड़क हादसे, दो लाख से ज्यादा मौतें: जस्टिस सप्रे

रीवा। उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि भारत में हर वर्ष पांच लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा लाखों लोग घायल होते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर हादसे का विश्लेषण कर उसके कारणों की पहचान और सुधार किया जाना जरूरी है।

जस्टिस सप्रे सोमवार को मध्य प्रदेश के रीवा प्रवास के दौरान कलेक्टर कार्यालय में उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जिले में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि रीवा में हादसों की संख्या अधिक है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी अधिकारी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करें।

उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के कई कारण होते हैं। खराब सड़क, दुर्घटना संभावित क्षेत्र, नशे में वाहन चलाना, यातायात नियमों का पालन नहीं करना और तेज गति प्रमुख कारण हैं। पुलिस अधिकारी प्रत्येक दुर्घटना का विस्तृत विश्लेषण करें। दुर्घटना के समय वाहन का प्रकार, उसकी गति और अन्य परिस्थितियों की जांच की जाए। यह भी देखा जाए कि वाहन चालक नशे में तो नहीं था। विश्लेषण के बाद सामने आए कारणों को दूर करने का प्रयास किया जाए। इससे 50 से 70 प्रतिशत तक दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।

जस्टिस सप्रे ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए वर्ष 2013 में उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके बाद न्यायालय ने सड़क दुर्घटनाओं की निगरानी शुरू की। उन्होंने कहा कि सुरक्षात्मक उपायों और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराकर कई हादसों को रोका जा सकता है। दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर भी मौतों को कम किया जा सकता है।

हेलमेट और सीट बेल्ट पर सख्ती के निर्देश

बैठक में जस्टिस सप्रे ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि जिले में दोपहिया वाहन चलाने वाले सभी शासकीय कर्मचारियों के लिए हेलमेट अनिवार्य किया जाए। स्कूल और कॉलेज में दोपहिया वाहन से आने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति हेलमेट पहनने पर ही मान्य की जाए। हेलमेट नहीं लगाने वाले दोपहिया वाहन चालकों और सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने वाले वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों में यातायात जागरूकता अभियान चलाने, चिन्हित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में तत्काल सुधार कराने और जहां दुर्घटना की आशंका अधिक हो वहां राजमार्ग से जुड़ने वाली ग्रामीण सड़कों पर गति अवरोधक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा समिति की हर महीने बैठक कर उसके निर्णयों को सख्ती से लागू करने, सड़कों में सुधार कराने तथा सड़कों से बेसहारा पशुओं को हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को भी कहा।

2022 से हादसों में कमी, 2025 में फिर बढ़ीं दुर्घटनाएं

रीवा कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि सड़क सुरक्षा समिति की हर महीने बैठक आयोजित की जा रही है। सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। जिले के तीन दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सड़क सुधार का काम पूरा किया गया है, जबकि सोहागी घाटी में सुधार कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरूकरण सिंह ने बताया कि पिछले पांच वर्षों की सड़क दुर्घटनाओं का वर्षवार विश्लेषण किया गया है। वर्ष 2022 से सड़क दुर्घटनाओं में लगातार कमी आई थी, लेकिन वर्ष 2025 में हादसों की संख्या फिर बढ़ी। इन्हें कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों से हो रही हैं। तेज गति और गलत तरीके से ओवरटेक करना हादसों के प्रमुख कारण हैं।

Related Articles

नवीनतम लेख