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Sunday, August 16, 2026

खान एवं खनिज संशोधन बिल पर झामुमो का विरोध, मंत्री बोले- वापस नहीं हुआ तो खनिज संपदा बाहर नहीं जाने देंगे

बोकारो। केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड में सियासी टकराव तेज हो गया है। लोकसभा और राज्यसभा से विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसके खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। बोकारो, पाकुड़, जमशेदपुर और साहिबगंज में पार्टी की बैठकों में नेताओं ने विधेयक को झारखंड के अधिकारों और आर्थिक हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने चेतावनी दी कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो झारखंड से खनिज संपदा की ढुलाई और इससे जुड़े संयंत्रों में उत्पादन तक रोकने का फैसला लिया जा सकता है।

बोकारो जिले के जैनामोड़ में झामुमो की कार्य समिति की बैठक हुई, जिसमें मंत्री योगेंद्र प्रसाद और चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में खान एवं खनिज संशोधन विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई और केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए नेताओं से सुझाव लिए गए। इन सुझावों को पार्टी की केंद्रीय कमेटी के समक्ष रखा जाएगा।

मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को केंद्रीय कमेटी के मंच पर रखेगी और वहां से निर्णय होने के बाद विधेयक के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यदि विधेयक वापस नहीं लेती है तो पार्टी झारखंड से खनिजों की ट्रांसपोर्टिंग और संबंधित प्लांटों में उत्पादन रोकने जैसे कदम पर विचार करेगी।

उन्होंने कहा कि झारखंड से कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक समेत बड़ी मात्रा में खनिज संपदा निकलती है। राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व और टैक्स पर विकास योजनाओं का बड़ा हिस्सा निर्भर करता है। उनका आरोप है कि संशोधित व्यवस्था से राज्य को उसके अधिकारों और राजस्व का नुकसान होगा। इसका असर महिलाओं, छात्रों और गरीबों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है, जिसे झामुमो किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।

चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी

पाकुड़ में भी विधेयक के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए झामुमो की बैठक हुई। राजमहल सांसद विजय हांसदा ने कहा कि पार्टी संशोधित विधेयक के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्र सरकार विधेयक को वापस नहीं लेती। उन्होंने विधेयक को ‘काला कानून’ बताते हुए आरोप लगाया कि इसे लोकसभा और राज्यसभा में जल्दबाजी में पारित कराया गया है।

विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि झामुमो विधेयक के खिलाफ लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाएगी। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती है तो पार्टी झारखंड से खनिज संपदा बाहर नहीं जाने देने के लिए आंदोलन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार खान और जमीन के विनियमन से जुड़े राज्य के अधिकारों को भी कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

झारखंड को आर्थिक नुकसान का दावा

जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सर्किट हाउस में झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने भी विधेयक को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि नए कानून के लागू होने से झारखंड को करीब 14,656 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है। उनके मुताबिक, इसका सीधा असर राज्य की विकास योजनाओं और आम लोगों के लिए संचालित जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर पड़ेगा।

साहिबगंज में भी विरोध का ऐलान

साहिबगंज शहर के टाउन हॉल में झामुमो जिला समिति की आपात बैठक जिला अध्यक्ष अरुण सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर चर्चा करते हुए पार्टी ने झारखंड के खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया।

अरुण सिंह ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के अधिकारों की रक्षा झामुमो के संघर्ष का ऐतिहासिक हिस्सा रहा है। पार्टी राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि विधेयक वापस लेने तक पार्टी अलग-अलग स्तरों पर आंदोलन को आगे बढ़ाएगी।

इस तरह खान एवं खनिज संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड में झामुमो और केंद्र सरकार के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। पार्टी ने जहां चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं उसके वरिष्ठ नेताओं ने खनिज संपदा की ढुलाई और उत्पादन रोकने तक की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में बड़ा संघर्ष बन सकता है।

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