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Monday, August 10, 2026

श्रीराम की आस्था से जुड़ा कोटेश्वर महादेव धाम

प्रयागराज। गंगा तट पर शिवकुटी क्षेत्र में स्थित प्राचीन कोटेश्वर महादेव मंदिर प्रयागराज की धार्मिक और पौराणिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की थी। सावन मास में इस प्राचीन धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

मंदिर के सचिव सुरेंद्र गिरी जी महाराज के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम अयोध्या लौटते समय प्रयागराज पहुंचे थे। उन्होंने महर्षि भारद्वाज से आशीर्वाद लिया। रावण के ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के कारण श्रीराम को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए शिव आराधना का विधान बताया गया।

मान्यता के अनुसार, महर्षि भारद्वाज ने भगवान श्रीराम को एक करोड़ शिवलिंगों के पूजन का महत्व समझाया। इसके बाद श्रीराम ने गंगा तट की बालू से शिवलिंग बनाकर विधिपूर्वक भगवान शिव की आराधना की। कहा जाता है कि यही दिव्य शिवलिंग आगे चलकर कोटेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

सावन में विशेष पूजा-अर्चना

सावन मास में कोटेश्वर महादेव मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रद्धालु गंगाजल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। सुख, शांति और लोककल्याण की कामना को लेकर भक्त दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर भी मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है।

सुरेंद्र गिरी ने बताया कि कोटेश्वर महादेव केवल एक प्राचीन शिवालय नहीं, बल्कि प्रयागराज की सनातन धार्मिक परंपरा और पौराणिक इतिहास का जीवंत प्रतीक है। भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यता इस धाम की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाती है। सदियों से श्रद्धालु यहां भगवान शिव की आराधना करते आ रहे हैं और यह परंपरा आज भी जारी है।

आस्था और इतिहास का संगम

गंगा तट पर स्थित कोटेश्वर महादेव धाम प्रयागराज की उस गौरवशाली धार्मिक परंपरा का साक्षी है, जहां गंगा, शिव और श्रीराम की आस्था एक साथ दिखाई देती है। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं प्रयाग की प्राचीन आध्यात्मिक पहचान को रेखांकित करती हैं।

सावन में होने वाला जलाभिषेक और विशेष पूजन इसी सनातन परंपरा की निरंतरता का प्रतीक है। गंगा तट पर विराजमान कोटेश्वर महादेव का यह प्राचीन धाम आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से उन्हें आध्यात्मिक शांति और कष्टों से मुक्ति का मार्ग मिलता है।

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