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Friday, July 31, 2026

पेपर लीक रोकथाम विधेयक पर राज्यसभा में घमासान, खरगे ने सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर छात्रों के भविष्य को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया, वहीं सरकार ने विधेयक को सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

खरगे ने सरकार पर लगाए आरोप

बहस के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने सवाल उठाया कि पेपर लीक रोकने के लिए यह विधेयक पहले क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के बजाय राजनीति में व्यस्त रही।

खरगे ने कहा कि यह विधेयक सुधारों के लिए नहीं, बल्कि दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की जांच एजेंसियों और कई राज्यों में भाजपा सरकार होने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सीबीआई, एनटीए और ईडी जैसी संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र तरीके से काम करतीं तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।

जितेंद्र सिंह ने गिनाए विधेयक के प्रावधान

इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक को सदन में पेश करते हुए कहा कि देश में चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) परीक्षाओं का आयोजन करती हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बनाने का विचार वर्ष 1992 में सामने आया था, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। इसके बाद कई समितियों ने भी इसकी सिफारिश की, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस लंबे समय से लंबित कार्य को पूरा किया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 के कानून के अनुभवों के आधार पर संशोधन किए गए हैं। यह सरकार की अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया को दर्शाता है।

पेपर लीक दोषियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान

संशोधित विधेयक में पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के रूप में नामित करने का अधिकार मिलेगा।

इसके तहत आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर रोजाना सुनवाई कर मामलों का निपटारा किया जा सकेगा। पेपर लीक या अनुचित साधनों के दोषी पाए जाने पर पांच से दस वर्ष तक की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

वहीं, संगठित गिरोहों के मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष जांच कार्यबल भी गठित कर सकेगी।

जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि वर्ष 2024 का कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्या की घटनाओं में भी कमी आई है। इस दौरान पूर्व में हुए पेपर लीक मामलों का जिक्र करने पर विपक्ष की ओर से विरोध और हंगामा भी देखने को मिला।

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