रांची: भगवान शिव की आराधना को समर्पित पवित्र सावन मास और श्रावणी मेले की शुरुआत गुरुवार से हो गई। सावन के पहले दिन राजधानी रांची पूरी तरह शिवमय नजर आई। शहर के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर, सुरेश्वर महादेव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए पहाड़ी मंदिर में इस बार विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर की सीढ़ियों की मरम्मत कराई गई है तथा आवागमन के लिए नए पेवर ब्लॉक मार्ग बनाए गए हैं। चढ़ने और उतरने के लिए अलग-अलग सीढ़ियां तथा महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित किए गए हैं, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी हुई है।
मंदिर समिति ने इस वर्ष जलाभिषेक के लिए अरघा सिस्टम की व्यवस्था की है। हालांकि इस व्यवस्था के माध्यम से जलार्पण की शुरुआत पहली सोमवारी से होगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में नि:शुल्क दूध, जल और बेलपत्र भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
श्रावणी मेले को लेकर सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में 60 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। सरकारी पूजा के बाद सुबह 4 बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। दर्शन और जलाभिषेक का समय सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक निर्धारित किया गया है।
रांची नगर निगम द्वारा मंदिर के आसपास से अतिक्रमण हटाए जाने के कारण इस बार श्रद्धालुओं की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है। प्रशासन और मंदिर समिति ने 3 अगस्त को पड़ने वाली पहली सोमवारी पर लाखों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की तैयारियां भी पूरी कर ली हैं।
मंदिर के पुजारी सुबोध पांडे ने बताया कि सावन को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग प्रवेश-निकास, अरघा सिस्टम और नि:शुल्क पूजन सामग्री की व्यवस्था की गई है। वहीं, श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन और मंदिर समिति की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए भगवान भोलेनाथ से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
