ढाका। बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) ने उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि शहाबुद्दीन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल में लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों पर चुप्पी साधकर तानाशाही व्यवस्था का समर्थन किया।
एनसीपी ने कानूनी कार्रवाई की उठाई मांग
स्थानीय समाचार पत्र प्रथम आलो के अनुसार, ढाका में आयोजित प्रेस वार्ता में एनसीपी के सदस्य सचिव अख्तर हुसैन ने कहा कि वर्ष 2024 के जनआंदोलन में जान गंवाने वालों को न्याय दिलाने और भविष्य में तानाशाही की वापसी रोकने के लिए शहाबुद्दीन के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना था कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उन्हें मिलने वाला संवैधानिक संरक्षण समाप्त हो गया है, इसलिए अब उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
बीएनपी पर भी लगाए आरोप
अख्तर हुसैन ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की भी आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी पहले से जानती थी कि शहाबुद्दीन राष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं, लेकिन महाभियोग चलाने के बजाय उन्हें विभिन्न सरकारी और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल कर उनका समर्थन करती रही।
एनसीपी के वरिष्ठ संयुक्त संयोजक आरिफुल इस्लाम अदीब ने आरोप लगाया कि बीएनपी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति पद पर अपना पसंदीदा उम्मीदवार लाना चाहती है और इसी रणनीति के तहत शहाबुद्दीन को हटाने की प्रक्रिया तेज की गई।
स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा
इस बीच, कार्यवाहक राष्ट्रपति का दायित्व संभाल रहे संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने बताया कि मोहम्मद शहाबुद्दीन ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं। हाल ही में उनमें ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी की भी पुष्टि हुई है, जिसके कारण उन्हें बेहोशी के दौरे पड़ते हैं और संवैधानिक दायित्व निभाना संभव नहीं रह गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति का इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत स्वीकार किया गया है और अनुच्छेद 54 के अनुसार उन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार हुई है और इसमें किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए।
दो वर्ष पहले ही छोड़ा पद
मोहम्मद शहाबुद्दीन 24 अप्रैल 2023 को अवामी लीग के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे। वर्ष 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के बाद उनके इस्तीफे की मांग उठी थी, लेकिन वह पद पर बने रहे। उन्होंने अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो वर्ष पहले इस्तीफा दे दिया।
