नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे केवल सीजेपी के नेतृत्व में चल रहा छात्र आंदोलन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों का बढ़ता दबाव भी अहम वजह माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई राज्यों में छात्रों के बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए राजग के सहयोगी दलों ने केंद्र सरकार से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र, बिहार सहित कई राज्यों के सहयोगी दलों ने सरकार को संकेत दिया था कि यदि समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन अन्य राज्यों में भी फैल सकता है। इससे राजग शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिति पर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।
सहयोगी दलों ने जल्द फैसला लेने की दी सलाह
सूत्रों का कहना है कि सहयोगी दलों ने केंद्र सरकार से इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने की बात कही। सरकार ने भी हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग स्वीकार करना उचित समझा और इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे में जिम्मेदारी स्वीकार की
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा कि उन्होंने पहले दिन से ही पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो और किसी छात्र के साथ अन्याय न होने पाए।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास किया।
