दिल की विफलता (Heart Failure) एक गंभीर स्थिति है, जिसमें दिल अपनी पम्पिंग क्षमता खो देता है और शरीर को पर्याप्त रक्त नहीं पहुंचा पाता। लेकिन एक नए खुलासे से पता चलता है कि लगभग 90 % ऐसे मरीजों में पहले से उच्च रक्तचाप (Hypertension) मौजूद रहा करता है। यह तथ्य इस बात को उजागर करता है कि यदि उच्च रक्तचाप पर समय रहते नियंत्रण नहीं रखा जाए, तो यह दिल पर बुरा असर डाल सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, उच्च रक्तचाप दिल की मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं पर निरंतर दबाव डालता है। यह दबाव दिल को अधिक मेहनत करने को मजबूर करता है, धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता कम होती जाती है और अंततः वह असमर्थ हो जाता है।
विशेष रूप से, एक प्रकार की दिल की विफलता जिसे HFpEF (Heart Failure with preserved Ejection Fraction) कहा जाता है, उसमें 80-90 % मामलों में मरीजों में पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर देखने को मिलता है। यह इस तथ्य को और पुष्ट करता है कि उच्च रक्तचाप यह पहले से मौजूद जोखिम कारक है।
क्यों हाई ब्लड प्रेशर से दिल फेलियर की संभावना बढ़ जाती है?
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उच्च रक्तचाप की स्थिति में दिल को अधिक दबाव में काम करना पड़ता है, जिससे दिल की दीवार मोटी हो जाती है और अंत में उसकी लोच कम हो जाती है।
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लगातार उच्च दबाव के कारण रक्त वाहिकाएँ संकीर्ण और कठोर हो सकती हैं, जिससे रक्त प्रवाह बिगड़ता है और दिल अधिक मेहनत करने लगता है।
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यदि उच्च रक्तचाप अनियंत्रित हो और समय रहते उपचार न हो तो यह दिल की विफलता की प्रक्रिया को तेजी से आगे ले जाता है।
बचाव और नियंत्रण के उपाय
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रक्तचाप जांचें नियमित रूप से — यदि दबाव सामान्य से ऊपर हो, तो विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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जीवनशैली में सुधार करें — कम नमक, संतुलित आहार, फल-सब्जियाँ, कम वसा।
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नियमित व्यायाम करें — प्रतिदिन हल्की से मध्यम गतिविधि बहुत फायदेमंद होती है।
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तनाव प्रबंधन — मानसिक तनाव को कम करने के उपाय जैसे ध्यान, योग, पर्याप्त नींद।
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दवाइयाँ समय पर लें — यदि डॉक्टर ने उच्च रक्तचाप की दवाइयाँ दी हों, तो उन्हें अनुशासित रूप से उपयोग करें।


