काठमांडू । नेपाल सरकार ने निजी शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर प्रस्तावित 3 प्रतिशत समता कर लागू नहीं करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस कर से आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
जनता की प्रतिक्रिया के बाद लिया फैसला
प्रधानमंत्री शाह ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से चर्चा के बाद शिक्षा समता शुल्क और स्वास्थ्य समता शुल्क फिलहाल लागू नहीं करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के विश्वास और अपेक्षाओं से बनी है और उसका उद्देश्य सुशासन स्थापित करते हुए नागरिकों को बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि 3 प्रतिशत समता कर का उद्देश्य दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों के लोगों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, दलित, वंचित और गरीब बच्चों की सहायता करना, स्वास्थ्य बीमा का विस्तार करना और इन योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना था।
गरीबों को सुविधा देने की योजना जारी रहेगी
प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि कर को लेकर नागरिकों की प्रतिक्रिया और असंतोष को सरकार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की आवाज सुनते हुए फैसलों में आवश्यक बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निजी अस्पतालों में 10 प्रतिशत बेड और निजी कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में 10 प्रतिशत सीटें गरीब और जरूरतमंद नागरिकों के लिए पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की नीति को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
