श्रीहरिकोटा। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में शनिवार को नया अध्याय जुड़ गया। देश का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक अपनी निर्धारित कक्षा में पहुंच गया। हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट का प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर 12:05 बजे किया गया। मिशन को ‘आगमन’ नाम दिया गया था।
रॉकेट का प्रक्षेपण पहले सुबह 11:30 बजे होना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे कुछ देर के लिए टाल दिया गया। करीब 15 मिनट की उड़ान के बाद विक्रम-1 ने सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे करते हुए 450 किलोमीटर ऊंची लक्षित कक्षा हासिल कर ली।
इसरो और प्रधानमंत्री ने दी बधाई
मिशन की सफलता पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने वैज्ञानिकों को बधाई दी। इसरो ने इसे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह देश के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है। संस्था ने इन-स्पेस और इसरो की टीमों की भी सराहना की, जिन्होंने तकनीकी सहयोग, सुरक्षा निगरानी और प्रक्षेपण संबंधी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी स्काईरूट एयरोस्पेस और उसके वैज्ञानिकों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका से बातचीत कर इस सफलता को देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया।
विशेष पेलोड भी ले गया विक्रम-1
विक्रम-1 अपने साथ कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रदर्शक पेलोड लेकर गया है। इनमें 18 कैरेट सोने से बना सूक्ष्म रॉकेट, नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी. वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की चावल के दाने से भी छोटी सूक्ष्म कलाकृतियां, एक हीरे का आभूषण, स्काईरूट का स्कोप उपग्रह तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हस्तलिखित ‘वंदे मातरम्’ संदेश वाला पोस्टकार्ड भी शामिल है।
छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए तैयार किया गया रॉकेट
24 मीटर लंबा विक्रम-1 छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए विकसित किया गया है। यह पूरी तरह कार्बन मिश्रित संरचना से निर्मित है, जिससे इसका वजन कम और क्षमता अधिक हो जाती है। कंपनी के अनुसार प्रयुक्त कार्बन फाइबर सामान्य इस्पात की तुलना में लगभग पांच गुना हल्का है।
स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। इससे पहले कंपनी ने 18 नवंबर 2022 को अपने पहले निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस का सफल परीक्षण किया था। अब विक्रम-1 की सफलता के साथ भारत निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में और अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।
