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Saturday, July 18, 2026

भारत टेक्स 2026 में उद्योग सचिव अरवा राजकमल ने किया झारखंड पवेलियन का अवलोकन

नई दिल्ली/रांची । राज्य सरकार पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने और स्थानीय कारीगरों व एमएसएमई इकाइयों के लिए नए व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है। भारत टेक्स 2026 जैसे आयोजन इस पहल को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

उद्योग सचिव श्री अरवा राजकमल ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 के समापन दिवस पर झारखंड पवेलियन का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के जीआई पहचान प्राप्त उत्पादों, तसर रेशम, हस्तकरघा और जनजातीय हस्तशिल्प का अवलोकन किया तथा उनकी सराहना की।

तसर रेशम बना झारखंड की पहचान

भारत टेक्स 2026 में झारखंड पवेलियन में प्रदर्शित तसर रेशम से बने परिधान, स्टोल, स्कार्फ और गृह सज्जा उत्पादों को विशेष सराहना मिली। झारखंड देश के प्रमुख तसर उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य के हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवार इस उद्योग से जुड़े हैं।

राज्य सरकार जीआई पहचान वाले उत्पादों, तसर, बांस आधारित उद्यमों और जनजातीय कला को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इससे स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को बेहतर बाजार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं।

वैश्विक मंच से बढ़ी व्यापारिक संभावनाएं

भारत टेक्स 2026 में 120 से अधिक देशों के खरीदारों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन में हजारों प्रदर्शकों ने वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प क्षेत्र के उत्पादों का प्रदर्शन किया।

इस वैश्विक मंच ने झारखंड के एमएसएमई, स्वयं सहायता समूहों, बुनकरों और महिला उद्यमियों को नए व्यापारिक संपर्क स्थापित करने तथा निर्यात की संभावनाओं को विस्तार देने का अवसर दिया।

झारखंड पवेलियन ने राज्य की पारंपरिक शिल्प और वस्त्र विरासत को वैश्विक खरीदारों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए व्यापारिक अवसरों की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

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