रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद विवाद गहरा गया है। परिणाम में कथित अनियमितता और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए मंगलवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आजसू छात्र संघ के नेतृत्व में बापू वाटिका से जेपीएससी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। इसके बाद आयोग कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया और परिणाम रद्द कर निष्पक्ष जांच की मांग की।
पारदर्शिता पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने आयोग और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा परिणाम आधी रात को जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए। उनका कहना है कि परिणाम संबंधी दस्तावेज पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और आयोग ने कटऑफ अंक भी सार्वजनिक नहीं किए हैं। उन्होंने आयोग परिसर की रात की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की भी मांग की।
अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर वायरल एक ओएमआर शीट का हवाला देते हुए दावा किया कि एक अभ्यर्थी के एक प्रश्नपत्र में 45 में 45 और दूसरे में 97 उत्तर सही बताए गए हैं, जिससे परिणाम पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में बाहरी राज्यों के कुछ अभ्यर्थियों को कथित रूप से पैसे और सेटिंग के जरिए लाभ पहुंचाया गया, जबकि झारखंड के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ।
एसओपी का पालन नहीं करने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी राहुल कुमार ने आरोप लगाया कि आयोग ने परिणाम जारी करने में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि परिणाम पर आयोग के अध्यक्ष या सक्षम सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके अलावा उत्तर कुंजी चार बार जारी किया जाना भी आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थिति को देखते हुए जेपीएससी कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो लालपुर चौक से रातू रोड तक सड़क जाम कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप कर परीक्षा परिणाम की निष्पक्ष जांच, चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार
अभ्यर्थियों के आरोपों पर झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
