देवघर। झारखंड सरकार की मंईयां सम्मान योजना का लाभ नहीं मिलने से देवघर जिले की सैकड़ों महिलाएं सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। महिलाओं का आरोप है कि शुरुआती कुछ किस्त मिलने के बाद उनके खातों में राशि आनी बंद हो गई, लेकिन इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें लंबे समय तक नहीं मिल सकी।
डीबीटी और नाम की गड़बड़ी से रुका भुगतान
देवघर और जसीडीह की महिलाओं ने बताया कि शिकायत लेकर ब्लॉक कार्यालय पहुंचने पर उन्हें कभी बैंक खाते में डीबीटी सक्रिय नहीं होने तो कभी राशन कार्ड और बैंक खाते में नाम अलग-अलग होने की वजह बताकर वापस भेज दिया गया। करीब एक वर्ष तक भटकने के बाद समाज सुरक्षा कोषांग में पता चला कि डीबीटी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण भुगतान रुका हुआ है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि तकनीकी जानकारी के अभाव में वे समस्या समझ नहीं सकीं, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। अब विभाग की ओर से त्रुटियों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उन्हें भुगतान मिलने की उम्मीद है।
सुधार की प्रक्रिया शुरू
सामाजिक कार्यकर्ता सरोज सिंह ने बताया कि कई महिलाओं के बैंक खाते और राशन कार्ड में नाम अलग-अलग दर्ज होने तथा डीबीटी सक्रिय नहीं होने के कारण योजना की राशि अटक गई थी। अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के बाद संबंधित खातों में डीबीटी सक्रिय कराने और नाम संबंधी त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जुलाई तक तीन महीने की 7,500 रुपये की राशि मिलेगी
समाज सुरक्षा कोषांग की अधिकारी सरिता भारती ने बताया कि देवघर जिले में करीब ढाई लाख महिलाएं मंईयां सम्मान योजना का लाभ ले रही हैं। जुलाई तक का भुगतान जल्द जारी किया जाएगा और तीन माह की 7,500 रुपये की राशि एक साथ लाभुकों के खातों में भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं को भुगतान नहीं मिल रहा है, उनके मामलों में बैंक खाते, डीबीटी या नाम संबंधी त्रुटियां प्रमुख कारण हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि फिलहाल पोर्टल पर नाम सुधार की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से कई मामलों में भुगतान लंबित है।
