कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जुलाई में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ उच्चस्तरीय बैठक होगी, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे की रणनीति तय की जाएगी।
घुसपैठ रोकने के लिए कई कदम उठाने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले चरण के तहत पिछले 45 दिनों में सीमा सुरक्षा बल को आवश्यक भूमि हस्तांतरित की गई है और 12 होल्डिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। उनके अनुसार, इन केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 10 हजार कथित घुसपैठियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस भेजा गया है, जबकि लगभग 1,500 लोग अभी भी इन होल्डिंग स्टेशनों में हैं।
उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों के थाने सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से कथित घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें जेल भेजने के बजाय होल्डिंग स्टेशनों में भेज रहे हैं, जहां से तय प्रक्रिया के अनुसार उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है। मतदाता सूची से हटाए गए नामों की भी समीक्षा की जा रही है।
एक अगस्त से शुरू होगी डिजिटल जातिगत जनगणना
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में एक अगस्त से डिजिटल माध्यम से जातिगत जनगणना शुरू होगी। इसका अंतिम परिणाम 28 फरवरी 2027 की मध्यरात्रि को जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें स्व-घोषणा की व्यवस्था भी रहेगी और प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकीय स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
उच्चस्तरीय समिति करेगी राज्यों का दौरा
केंद्र सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति भी जल्द पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों का दौरा करेगी। दौरे से पहले समिति के सदस्यों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। समिति राज्य सरकार और प्रशासन से जानकारी जुटाकर जनसांख्यिकीय बदलाव, कथित अवैध घुसपैठ तथा उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करेगी।
पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्य के बीच प्रस्तावित बैठक तथा उच्चस्तरीय समिति का दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
