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Wednesday, July 1, 2026

अमेरिका-ईरान ने लेबनान ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ के लिए दूत नियुक्त किए: घालीबाफ

तेहरान। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान ने लेबनान में तनाव कम करने और युद्धविराम बनाए रखने के उद्देश्य से गठित ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ के लिए अपने-अपने दूत नियुक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि इन दूतों का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच गलतफहमी और संभावित सैन्य टकराव को रोकना है।

लेबनान में तनाव कम करने पर सहमति

घालीबाफ ने सरकारी प्रेस टीवी को दिए साक्षात्कार में कहा कि स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के दौरान लेबनान में युद्धविराम लागू कराने और तनाव कम करने के लिए विशेष ‘लेबनान डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ के गठन पर सहमति बनी थी। इसी के तहत दोनों देशों ने अपने प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है।

एमओयू की शर्तें पूरी होने पर ही आगे बढ़ेगी वार्ता

घालीबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ आगे की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब समझौता ज्ञापन (एमओयू) की पांच प्रमुख शर्तों को लागू किया जाएगा। इनमें लेबनान में युद्ध रोकना, ईरानी तेल निर्यात की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना शामिल है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख स्पष्ट

ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि ईरान और ओमान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सेवाओं के प्रशासन से जुड़े कानूनी और सेवा संबंधी मामलों पर सहमति बना चुके हैं।

उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सबसे बड़ी सामरिक ताकत है और इस पर देश अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।

‘ईरान अपनी संप्रभुता से पीछे नहीं हटेगा’

घालीबाफ ने कहा कि अमेरिका को यह दावा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य का सैन्यीकरण किया है। उनके अनुसार यह जलमार्ग ईरान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और देश किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि एमओयू के तहत केवल 60 दिनों के लिए समुद्री सेवा शुल्क में अस्थायी छूट दी गई है, लेकिन इससे ईरान की संप्रभुता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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