पूर्वी सिंहभूम। विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार द्वारा 8 जून को स्वास्थ्य मंत्री को लिखे गए पत्र की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और रिम्स प्रशासन से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सीआईडी पूछताछ और इस्तीफे पर उठाए सवाल
शुक्रवार को जारी बयान में सरयू राय ने कहा कि डॉ. राजकुमार से सीआईडी ने लगातार आठ घंटे तक पूछताछ की, जिससे वे मानसिक रूप से आहत हुए और अंततः उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने दावा किया कि इस्तीफे से पहले लिखे गए पत्र में डॉ. राजकुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र के अनुसार, शासी परिषद को विश्वास में लिए बिना उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की गई और लगातार प्रशासनिक दबाव बनाया गया।
अवैध भुगतानों की स्वीकृति के लिए दबाव का आरोप
सरयू राय ने कहा कि पत्र में रिम्स की शासी परिषद और निदेशक पर विभिन्न मामलों में दबाव बनाए जाने का भी उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद कुछ मामलों में कार्रवाई के लिए दबाव डाला गया और झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित करने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल 2025 को हुई रिम्स शासी परिषद की 59वीं बैठक का हवाला देते हुए पत्र में दावा किया गया है कि पिछली बैठक से जुड़े कुछ कथित अवैध भुगतानों को स्वीकृति नहीं देने पर डॉ. राजकुमार पर दबाव बनाया गया और उन्हें धमकाया गया।
सरयू राय ने कहा कि डॉ. राजकुमार एक अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट हैं और उन्होंने रिम्स में अपने कार्यकाल के दौरान कई जटिल न्यूरो सर्जरी सफलतापूर्वक कीं। इसके बावजूद यदि उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, तो यह संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रिम्स में आने वाले सक्षम निदेशक अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाते, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग की अनावश्यक दखलंदाजी और प्रशासनिक दबाव संस्थान के कामकाज को प्रभावित करता है। सरयू राय ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
