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Tuesday, June 23, 2026

खूंटी: स्थायी लोक अदालत की न्याय निर्णयन शक्तियों पर डीएलएसए ने आयोजित की कार्यशाला

खूंटी । झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), खूंटी द्वारा मंगलवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला स्थायी लोक अदालत की सांविधिक प्रक्रिया, सुलहकारी अधिदेश एवं न्याय निर्णयन शक्तियों पर केंद्रित थी, जो प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष डीएलएसए खूंटी रसिकेश कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।

नियमित और स्थायी लोक अदालत में मुख्य अंतर स्पष्ट

कार्यशाला के दौरान डीएलएसए सचिव सह सिविल न्यायाधीश (वरीय प्रभाग) कमलेश बेहरा ने स्थायी लोक अदालत के वैधानिक ढांचे को समझाया। उन्होंने आम जनता के लिए इसके सबसे बड़े लाभ और तकनीकी अंतर को स्पष्ट किया:

  • निःशुल्क और प्रभावी मंच: यह विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम, 1987 के तहत लोक उपयोगिता सेवाओं (Public Utility Services) से जुड़े वाद-पूर्व (Pre-Litigation) मामलों के निपटारे का एक बेहतरीन मंच है।

  • निर्णय का विशेष अधिकार: नियमित लोक अदालतें केवल दोनों पक्षों के बीच सुलह या समझौता कराती हैं। इसके विपरीत, स्थायी लोक अदालत को सुलह विफल होने की स्थिति में भी विवाद का गुण-दोष (Merits) के आधार पर अंतिम निर्णय देने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

  • बाध्यकारी आदेश: स्थायी लोक अदालत द्वारा सुनाया गया फैसला अंतिम होता है और वह दोनों ही पक्षकारों पर पूरी तरह बाध्यकारी (Binding) होता है।

विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की अपील

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्थायी लोक अदालत खूंटी के अध्यक्ष कौशलेश कुमार सिंह ने विभिन्न लोक उपयोगिता विभागों से आए प्रतिनिधियों को इसकी कार्यप्रणाली से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अदालतों में मुकदमों का बोझ कम करने और जनता को त्वरित न्याय देने के लिए सभी हितधारकों को इस मंच का सक्रिय सहयोग करना चाहिए।

बैंकिंग और एनपीए मामलों पर भी हुई चर्चा

अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) अजीत कुमार ने कार्यशाला में वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कानूनी पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने:

  • एनपीए (NPA) खातों की रिकवरी, बैंकिंग प्रक्रियाओं और परिसीमा अवधि (Limitation Period) से जुड़े तकनीकी नियमों की जानकारी दी।

  • बैंकों से जुड़े लंबित मामलों को स्थायी लोक अदालत के माध्यम से त्वरित गति से निपटाने में जिला प्रशासन और विधिक प्राधिकार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

इस विधिक कार्यशाला में स्थायी लोक अदालत की सदस्य मधु चंदा कुमार रजकरूबी कुमारी, मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शी (LADC) राजीव कमल, विभिन्न पैनल अधिवक्ता, पैरा लीगल वालंटियर (PLV) तथा बिजली, पानी, बीमा और बैंकिंग जैसे कई लोक उपयोगिता सेवा विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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