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Tuesday, June 23, 2026

छग कैबिनेट: ‘कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026’ और ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना’ सहित कई बड़े फैसलों को मंजूरी

रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कई दूरगामी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रिपरिषद ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026” के प्रारूप को मंजूरी देने के साथ ही ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए दो बड़ी योजनाओं की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त किया है।

1. कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026 को हरी झंडी

राज्य में कचरे और जैविक अपशिष्ट से स्वच्छ ऊर्जा बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है। इस नीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • वैज्ञानिक प्रबंधन: इसके तहत राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में बदला जाएगा।

  • बड़ा उत्पादन लक्ष्य: ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के अनुसार, राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन सीबीजी उत्पादन की अपार संभावना है।

  • नोडल एजेंसी: इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ‘छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण’ को राज्य नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है, जबकि ऊर्जा विभाग को प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।

2. वीबी-जी राम जी योजना: 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के संकट को दूर करने और युवाओं को संबल देने के लिए मंत्रिपरिषद ने ’’वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’’ के प्रारूप का अनुमोदन किया है।

  • इस योजना के अंतर्गत पात्र ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक (कानूनी) गारंटी दी जाएगी।

  • राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 4,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है।

3. अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना: मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

गांवों में स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए ’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ योजना शुरू करने का बड़ा फैसला लिया गया है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में निम्नलिखित बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा:

  • सृजन केंद्र: हथकरघा, बुनाई-सिलाई, और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए।

  • प्रसंस्करण इकाइयां: दलहन, तिलहन, राइस मिल और डेयरी आदि की स्थापना।

  • सेवा केंद्र: कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत केंद्र और ‘अटल डिजिटल केंद्र’।

  • नोडल विभाग: इस योजना के संचालन के लिए ‘पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग’ को नोडल विभाग और ‘छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’ को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

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