काठमांडू, 19 जून। नेपाल में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 21 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी किए जाने के बाद देश पर सालाना लगभग 7,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। इस भारी खर्च को पूरा करने के लिए अब सरकार को विदेशी कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव के दौरान विदेशी ऋण न लेने का वादा करने वाली राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने के महज दो महीनों के भीतर ही करीब 2,000 करोड़ रुपये का विदेशी ऋण स्वीकार कर लिया है।
आगामी वित्तीय वर्ष में ₹2,047 करोड़ के विदेशी ऋण की तैयारी
नेपाल सरकार आगामी आर्थिक वर्ष में भी विभिन्न वैश्विक वित्तीय संस्थाओं और मित्र देशों से कुल 2,047 करोड़ रुपये तक का विदेशी ऋण और अनुदान जुटाने की तैयारी में है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मिलने वाला संभावित ऋण:
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एशियाई विकास बैंक (ADB): 1,016 करोड़ रुपये
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF): 630 करोड़ रुपये
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एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB): 412 करोड़ रुपये
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ओपेक (OPEC): 45 करोड़ रुपये
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अन्य संस्थाएं (IFAD, GPE व संयुक्त PP): कुल मिलाकर लगभग 833 करोड़ रुपये
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प्रशासनिक खर्चों में होगा इस राशि का उपयोग
नेपाल सरकार इन सभी वित्तीय संसाधनों और कर्ज का उपयोग मुख्य रूप से आंतरिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए करने जा रही है। इस राशि का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों के बढ़े हुए वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवानिवृत्ति (Retirement) के प्रबंधन के लिए किया जाएगा। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि विकास कार्यों के बजाय प्रशासनिक खर्चों के लिए विदेशी कर्ज पर निर्भरता बढ़ना नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
