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Thursday, June 18, 2026

लिव-इन रिलेशनशिप पर कानून बनाकर प्रतिबंध लगाए सरकार: शांता कुमार

शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने लिव-इन रिलेशनशिप (बिना विवाह साथ रहने) की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस व्यवस्था पर कानून बनाकर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। शांता कुमार का कहना है कि आपसी प्रेम संबंध रखने वाले युवक-युवतियों को सामाजिक व कानूनी रूप से विवाह करना चाहिए, अन्यथा उन्हें अपने परिवारों के साथ ही रहना चाहिए।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत

गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में शांता कुमार ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक हालिया फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इस फैसले के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया:

  • सुरक्षा देने से इनकार: अदालत ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक जोड़े (युवक-युवती) को सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था, जो अपने परिवारों के दबाव के खिलाफ कोर्ट पहुंचे थे।

  • पारिवारिक अधिकारों का हनन: अदालत ने टिप्पणी की थी कि ऐसा कदम उठाकर दोनों युवा अपने परिवारों के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे उनके माता-पिता और परिवार को सामाजिक बदनामी झेलनी पड़ रही है।

  • पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव: न्यायालय ने अपने निर्णय में माना कि पश्चिमी सभ्यता के अंधाधुंध प्रभाव के कारण भारत में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।

संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला

पूर्व मुख्यमंत्री ने न्यायिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सम्मान और शांति के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। न्यायालय के अनुसार, बिना विवाह के साथ रहने की स्थिति में न केवल उस जोड़े बल्कि उनके पूरे परिवार के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सामाजिक मूल्यों और सुरक्षा पर संकट

उन्होंने केंद्र सरकार से बेहद कड़े शब्दों में आग्रह किया है कि समय रहते इस दिशा में स्पष्ट और सख्त कानून बनाया जाए ताकि देश की युवा पीढ़ी को भटकने से बचाया जा सके और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

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