दोहा/वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच शांति समझौते का दावा सामने आया है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों ने समझौते के मसौदे पर सहमति बना ली है और औपचारिक हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हैं। हालांकि समझौते के सभी आधिकारिक दस्तावेज और शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
शांति समझौते की पुष्टि का दावा
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी दोनों पक्षों के बीच अंतिम मसौदे पर सहमति बनने की बात कही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी दावा किया है कि समझौता प्रभावी हो चुका है और इसके औपचारिक हस्ताक्षर जल्द होंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर रहेगा दुनिया की नजर
समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि समझौता पूरी तरह लागू होता है तो क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
ट्रंप के बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
अमेरिकी राजनीति में इस समझौते को लेकर प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज ने कहा कि अमेरिका पहले भी ईरान के साथ परमाणु समझौता कर चुका था, जिसे बाद में ट्रंप प्रशासन ने समाप्त कर दिया था। उन्होंने वर्तमान स्थिति को लेकर ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
कई देशों ने किया स्वागत
कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित कई देशों ने इस कथित समझौते का स्वागत किया है। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने भी उम्मीद जताई कि इससे मध्य पूर्व में शांति और सुरक्षा का माहौल मजबूत होगा।
अभी भी कई सवाल बाकी
हालांकि समझौते की घोषणा के बावजूद कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न समूहों की प्रतिक्रिया, समझौते की वास्तविक शर्तें और इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और साफ होगी।
