30.4 C
Kolkata
Friday, June 12, 2026

ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप की ‘खार्क आइलैंड’ पर कब्जे की धमकी के बाद बड़ा यू-टर्न, ईरान ने दावों को बताया ‘झूठ’

वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सबसे बड़े तेल हब ‘खार्क आइलैंड’ (Kharg Island) को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने और भीषण हमले की धमकी देने के कुछ ही घंटों बाद, अचानक युद्ध विराम और शांति समझौते का दावा कर दिया गया है। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें ‘झूठ’ करार दिया है।

ट्रंप की धमकी और अचानक यू-टर्न

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पहले बेहद आक्रामक पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी सेना ईरान पर ‘बेहद भीषण’ हमला करने जा रही है और जल्द ही ईरान के लाइफलाइन माने जाने वाले खार्क आइलैंड और उसके पूरे तेल-गैस बाजार पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण होगा।

लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद, ट्रंप ने अपने तेवर बदलते हुए एक और पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व के शीर्ष स्तर के साथ बातचीत बहुत आगे बढ़ चुकी है और दोनों देश एक शांति समझौते के बेहद करीब हैं, जिसके कारण उन्होंने तय मिसाइल हमलों को फिलहाल रोक दिया है।

ईरान का पलटवार: ‘ट्रंप का दावा महज झूठ’

तेहरान ने ट्रंप के इस दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई और ईरानी सरकारी मीडिया ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप का यह दावा कि ईरान ने शर्तों को पूरी तरह मंजूर कर लिया है, पूरी तरह गलत है। ईरान का कहना है कि वे किसी भी सैन्य दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।

सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ (IRNA) के मुताबिक, ईरान किसी भी समझौते में यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के अपने अधिकार को नहीं छोड़ेगा और न ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का नियंत्रण अमेरिका या किसी अन्य शक्ति को सौंपने के लिए तैयार है।

क्यों खास है खार्क आइलैंड (Kharg Island)?

फारस की खाड़ी में स्थित खार्क आइलैंड ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। युद्ध शुरू होने से पहले ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी द्वीप के टर्मिनलों से निर्यात होता था, जिसका मुख्य खरीदार चीन है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिकी सेना इस द्वीप पर सीधे कब्जा करने की कोशिश करती है, तो यह युद्ध को खत्म करने के बजाय और अधिक लंबा और भयानक बना सकता है, क्योंकि वहां अमेरिकी सैनिकों को ईरानी ड्रोन्स और मिसाइलों का सीधा सामना करना पड़ेगा।

फिलहाल इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच वैश्विक बाजार बेहद उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं, और पूरी दुनिया की नजरें अब खाड़ी क्षेत्र में होने वाली अगली सैन्य हलचल पर टिकी हुई हैं।

Related Articles

नवीनतम लेख