नई दिल्ली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में झारखंड के समग्र विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य को खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर मैन्युफैक्चरिंग हब और नॉलेज इकोनॉमी के रूप में विकसित करने का विजन रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड को केवल खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में बराबरी के भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने राज्य में क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योग, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने माइनिंग क्षेत्र में एआई आधारित तकनीक और सस्टेनेबल माइनिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए झारखंड में पीएमश्री और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग की। उन्होंने बताया कि युवाओं को एआई, ड्रोन, ईवी और सोलर तकनीक में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन के तहत 6000 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये के भुगतान तथा पीपीपी मॉडल पर प्रस्तावित दो मेडिकल कॉलेजों को शीघ्र मंजूरी देने का आग्रह किया।
डिजिटल गवर्नेंस, कृषि, पोषण और खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में एआई आधारित डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। साथ ही झारखंड में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की मांग भी केंद्र सरकार के समक्ष रखी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से झारखंड विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
