कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़क पर आ गया है। श्रीरामपुर से टीएमसी के लोकसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। कल्याण बनर्जी ने एलान किया है कि वह या उनका परिवार अब भविष्य में अभिषेक बनर्जी के किसी भी कानूनी मामले की पैरवी कोर्ट में नहीं करेगा।
जूनियर वकील को केस सौंपने पर भड़के कल्याण बनर्जी
यह पूरा विवाद विधायक हस्ताक्षर विसंगति प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें सीआईडी (CID) के समन को चुनौती देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। कल्याण बनर्जी ने बताया कि बुधवार को उन्होंने खुद कोर्ट से इस मामले पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था। लेकिन बुधवार रात को अभिषेक बनर्जी ने उनके बेटे को फोन कर कहा कि अदालत में उनकी तरफ से कोई दूसरा जूनियर वकील पेश होगा। इस बात से आहत होकर कल्याण बनर्जी ने केस से हटने का फैसला किया।
अभिषेक बनर्जी के अहंकार के कारण चुनाव में हारी पार्टी
कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी का व्यवहार लगातार अहंकारी बना हुआ है। हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बावजूद उनके इस रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने साफ कहा कि वह पिछले 45 वर्षों से वकालत के पेशे में हैं और अब अभिषेक बनर्जी का यह अहंकार उनके लिए बर्दाश्त से बाहर हो चुका है।
ममता बनर्जी को खुला संदेश: या अभिषेक रहेंगे या हम
कल्याण बनर्जी ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को स्पष्ट संदेश देते हुए आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह ममता बनर्जी से आग्रह करेंगे कि वे अब तय कर लें कि उन्हें पार्टी में अभिषेक बनर्जी चाहिए या वे लोग जो आज भी उनके प्रति पूरी तरह निष्ठावान हैं। कल्याण बनर्जी ने दो टूक कहा, “या तो अभिषेक को रखें और हमें छोड़ दें, या हमें रखें और अभिषेक को हटाएं।”
पूरा परिवार और जूनियर वकील भी नहीं लड़ेंगे केस
वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी साफ कर दिया कि यह फैसला सिर्फ उनका नहीं है। उनके पुत्र शीर्षण्य बनर्जी, जो स्वयं एक अधिवक्ता हैं, और उनके अधीन काम करने वाले सभी कनिष्ठ (जूनियर) वकील भी अब अभिषेक बनर्जी से संबंधित किसी भी कानूनी मामले में शामिल नहीं होंगे। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही टीएमसी के लिए दो शीर्ष नेताओं का यह खुला टकराव नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
