पूर्वी सिंहभूम| झारखंड के कोल्हान क्षेत्र के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना अब धरातल पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रशासनिक, तकनीकी और पर्यावरणीय स्तर पर आ रही प्रमुख अड़चनों के दूर होने के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने पहले चरण के निर्माण कार्यों की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इस हवाई अड्डे के बनने से कोल्हान के करीब 49 लाख लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों को भी सीधी हवाई कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
मानगो स्थित गेस्ट हाउस में बुधवार को जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) सबा आलम अंसारी ने प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि प्रथम चरण के लिए जरूरी करीब 100 हेक्टेयर भूमि से संबंधित सभी पर्यावरणीय और वन रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी गई है। दिल्ली से अंतिम हरी झंडी मिलते ही ग्राउंड पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सांसद विद्युत वरण महतो ने परियोजना में हुई देरी का कारण बताते हुए कहा कि पुराने सर्वे में एक बड़ी तकनीकी चूक हुई थी। पहले के सर्वे में एयरपोर्ट क्षेत्र में मौजूद बांस के झुरमुटों को पेड़ों की श्रेणी में गिन लिया गया था, जिससे क्लीयरेंस अटक गया था। चूंकि सरकारी मानकों के अनुसार बांस पेड़ नहीं बल्कि घास की श्रेणी में आता है, इसलिए इस तथ्य के स्पष्ट होते ही अब पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया बेहद तेज हो गई है।
जमशेदपुर से महज 55 किलोमीटर की दूरी पर प्रस्तावित यह एयरपोर्ट कोल्हान और आसपास के जिलों की सूरत बदल देगा। वर्तमान में इस क्षेत्र के लोगों को हवाई यात्रा के लिए करीब ढाई घंटे का सफर तय कर रांची एयरपोर्ट जाना पड़ता है। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट चालू होने से यह समय और दूरी काफी कम हो जाएगी। इसका सीधा फायदा घाटशिला, चाईबासा, सरायकेला-खरसावां के अलावा ओडिशा के बारीपदा और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया व झाड़ग्राम जैसे क्षेत्रों को मिलेगा।
इस एयरपोर्ट को क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास का बड़ा आधार माना जा रहा है। इसके निर्माण और संचालन से कोल्हान में रोजगार के बड़े अवसर खुलेंगे। सांसद के अनुसार, इस परियोजना से करीब 75 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही जमशेदपुर-धालभूमगढ़ कॉरिडोर को नए औद्योगिक और आवासीय हब के रूप में विकसित करने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है, जिससे क्षेत्र में निवेश, व्यापार और पर्यटन को एक नई रफ्तार मिलेगी।
