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Wednesday, June 3, 2026

मंदिरों के मुरझाए फूलों ने बदली महिलाओं की तकदीर: अगरबत्ती और धूप बनाकर संवार रहीं जिंदगी

पूर्वी सिंहभूम| जिले के मंदिरों में श्रद्धा के साथ चढ़ाए जाने वाले फूल, जो कुछ घंटों बाद मुरझाकर कचरे का हिस्सा बन जाते थे, अब स्थानीय महिलाओं की तकदीर बदल रहे हैं। सालों से बेकार समझकर फेंके जाने वाले इन आस्था के फूलों से अब स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बेहतरीन और उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से शुरू हुई इस अनूठी पहल ने न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनाया है।

वर्तमान में इस विशेष कार्यक्रम से क्षेत्र की लगभग 30 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं पूर्वी सिंहभूम के कई प्रसिद्ध मंदिरों से हर दिन टनों फूल इकट्ठा करती हैं। इसके बाद इन फूलों की छंटनी कर इन्हें सुखाया जाता है और एक खास ऑर्गेनिक प्रक्रिया के जरिए इनसे सजावटी सामान, सुगंधित अगरबत्ती, धूप और कोन (Cone) जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जो फूल कभी नालियों या नदियों में बहकर प्रदूषण फैलाते थे, वे अब बाजारों में बिकने वाले महकते उत्पादों का रूप ले चुके हैं।

इस अभियान के तहत सोनारी के प्रसिद्ध राम मंदिर और मौनी बाबा मंदिर, साकची के मनोकामना मंदिर, टिनप्लेट काली मंदिर, बेलडीह कालीबाड़ी मंदिर, जादूगोड़ा के रंकिनी मंदिर, पोटका के हरिना मंदिर और गालूडीह के वैष्णो देवी मंदिर समेत कई बड़े धार्मिक स्थलों से नियमित रूप से फूलों का संग्रह किया जाता है।

इस पहल का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि इससे जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ उत्पाद ही नहीं बना रहीं, बल्कि वे प्रोडक्शन मैनेजमेंट, क्वालिटी कंट्रोल, स्टॉक मेंटेनेंस और मार्केटिंग जैसी बड़ी व्यावसायिक जिम्मेदारियां भी खुद संभाल रही हैं। घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब सीधे तौर पर उद्यमिता (इको-प्रेन्योरशिप) से जुड़कर नेतृत्वकर्ता की भूमिका में आ गई हैं।

अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके जरिए अब तक 5.5 टन से अधिक मंदिरों के फूलों के कचरे का रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) किया जा चुका है। इन उत्पादों की बिक्री से महिलाओं ने 61 हजार रुपये से अधिक की सीधी आय भी अर्जित की है। इस अभियान को और बड़े पैमाने पर ले जाने के लिए अब बागुनहातु कौशल केंद्र में एक समर्पित उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जा रहा है, जहां महिलाओं को पैकेजिंग, भंडारण और नए इनोवेटिव प्रोडक्ट्स बनाने का एडवांस प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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