रांची| राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की अधिग्रहीत जमीन से जुड़े बहुचर्चित और हाईप्रोफाइल फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार दो आरोपितों, राजकिशोर बड़ाईक और कार्तिक बड़ाईक की जमानत याचिका पर बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत में सुनवाई पूरी हो गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और गंभीर तर्कों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में आगामी 6 जून को अदालत अपना मुख्य आदेश सुनाएगी।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत से दोनों आरोपितों को जमानत देने की पुरजोर मांग की। उन्होंने दलील दी कि मामले की जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है और दोनों आरोपित जांच एजेंसी का पूरा सहयोग कर रहे हैं। दूसरी तरफ, एसीबी के विशेष वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला सरकारी कीमती जमीन से जुड़े एक बड़े और सुनियोजित फर्जीवाड़े का है। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपितों की भूमिका बेहद गंभीर है और अभी कई महत्वपूर्ण कड़ियों की जांच होना बाकी है, इसलिए इन्हें जमानत न दी जाए।
बता दें कि एसीबी ने इस बड़े घोटाले में कार्रवाई करते हुए गत 7 अप्रैल को चार आरोपितों—राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन सभी ने आपस में मिलीभगत कर रिम्स के लिए अधिग्रहीत सरकारी भूमि को अपनी निजी संपत्ति साबित करने के लिए फर्जी वंशावली और जाली सरकारी दस्तावेज तैयार किए थे। इन्हीं फर्जी कागजातों के बूते सरकारी जमीन पर मालिकाना हक का अवैध दावा करने की साजिश रची गई थी।
यह पूरा मामला झारखंड उच्च न्यायालय के कड़े संज्ञान में आने के बाद सुर्खियों में आया था। हाई कोर्ट के सीधे निर्देश पर एसीबी ने इसी साल 5 जनवरी को प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर इस घोटाले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान जब राजस्व अभिलेखों और सरकारी भूमि के रिकॉर्ड की कड़ाई से पड़ताल की गई, तो परत-दर-परत कई चौंकाने वाले फर्जीवाड़े सामने आए, जिसके बाद ये गिरफ्तारियां हुईं।
दरअसल, यह पूरा विवाद वर्ष 1964-65 में रिम्स के लिए अधिग्रहीत की गई करीब 9.65 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि इस जमीन के बड़े हिस्से पर भू-माफियाओं ने अवैध कब्जा किया और उसे निजी जमीन बताकर वहां अपार्टमेंट, दुकानें और आवासीय इमारतें खड़ी कर दीं। मामला कोर्ट पहुंचने पर उच्च न्यायालय ने इस जमीन को रिम्स की संपत्ति घोषित किया, जिसके बाद प्रशासन ने वहां बने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया था। फिलहाल सभी आरोपित न्यायिक हिरासत में जेल में हैं और अब सबकी नजरें 6 जून को आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
