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Wednesday, June 3, 2026

बिहार में कोचिंग संस्थानों पर कसेगा शिकंजा: तीन महीने में आएगी नई नीति, भ्रामक प्रचार और अराजकता पर लगेगी रोक

पटना| राजधानी पटना में चर्चित शिक्षक खान सर के ग्लोबल कोचिंग सेंटर में हुई तोड़फोड़ और हंगामे की घटना के बाद बिहार सरकार कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर कड़े कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने घोषणा की है कि सरकार अगले तीन महीने के भीतर एक नई कोचिंग नीति लागू करेगी। इसके तहत संस्थानों के संचालन, प्रचार-प्रसार और उनकी जवाबदेही को लेकर बेहद स्पष्ट और कड़े नियम तय किए जाएंगे।

भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित सहयोग शिविर के बाद मीडिया से बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य कोचिंग सेक्टर में पारदर्शिता और अनुशासन लाना है। उन्होंने साफ किया कि नई नीति के जरिए किसी भी प्रकार की अराजकता, साजिश, भ्रामक विज्ञापनों या अव्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक व्यापक ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ (आचार संहिता) तैयार करने जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद अलग-अलग कोचिंग संस्थानों के बीच सफल छात्रों को अपना बताने और श्रेय लेने की होड़ मच जाती है, जिससे छात्र और अभिभावक भ्रमित होते हैं। नए नियमों के तहत विज्ञापनों, छात्र नामांकन और परीक्षा परिणामों के उपयोग को लेकर सख्त कानूनी दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।

उन्होंने दोक टूक शब्दों में कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है, लेकिन हिंसा, दबाव, तोड़फोड़ और कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करेगी। पटना की हालिया घटना पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि संस्थानों की आपसी रंजिश अब शैक्षणिक माहौल को खराब कर रही है, जिस पर सरकार की पैनी नजर है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री ने कुछ कोचिंग संचालकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई छात्र आंदोलनों के पीछे कुछ कोचिंग संचालक अपने निजी हितों को साधने के लिए छात्रों को आगे कर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास करते हैं। टीआरई-4 शिक्षक भर्ती आंदोलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तब भी कुछ संगठित समूहों द्वारा छात्रों की आड़ में दबाव बनाने के संकेत मिले थे।

शिक्षा मंत्री ने अंत में स्पष्ट किया कि इस नई नीति का मकसद केवल नियंत्रण करना नहीं, बल्कि छात्रों के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और विवाद-रहित माहौल तैयार करना है ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। सरकार को भरोसा है कि इस कदम से कोचिंग उद्योग में अनुशासन आएगा और अभिभावकों का विश्वास मजबूत होगा।

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