खूंटी| झारखंड की मूल पहचान ‘जल-जंगल-जमीन’ और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर खूंटी प्रखंड के सिल्दा गांव में एक वृहद जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘झारखंड जस्ट ट्रांजिशन नेटवर्क सारथी’ और ‘लोक स्वर’ के संयुक्त तत्वावधान में सारथी नेटवर्क के वार्षिक स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में गुरुवार को आयोजित किया गया था। इस दौरान पर्यावरण सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया।
पांच गांवों के ग्राम प्रधानों और महिला समूहों ने की शिरकत
सिल्दा गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में सिल्दा, डांडोल, डुंगरा, कलामाटी एवं चालागी गांवों के ग्राम प्रधानों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही महिला समूहों की नेत्रियां, किशोरी समूह की सदस्याएं, वार्ड सदस्य, सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
फोकस ग्रुप डिस्कशन में गूंजा हीट वेव और जल संकट का मुद्दा
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष ‘फोकस ग्रुप डिस्कशन’ (FGD) का आयोजन किया गया। इसमें वर्तमान समय में तेजी से बढ़ते तापमान, भीषण गर्मी (हीट वेव), जल संकट, जल संरक्षण तथा जंगल और जमीन की सुरक्षा जैसे जलते मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। परिचर्चा में शामिल प्रबुद्धजनों ने इस बात पर जोर दिया कि झारखंड की प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए अब सामुदायिक स्तर पर ठोस और सामूहिक पहल करने की सख्त जरूरत है।
पौधों का वितरण, जागरूकता रैली और पेसा कानून के तहत शपथ
पर्यावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों के बीच फलदार और छायादार पौधों का वितरण किया गया। इसके बाद पूरे पंचायत क्षेत्र में एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई, जिसके जरिए ग्रामीणों को पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी ग्रामीणों ने पेसा (PESA) कानून के अधिकारों का सहयोग लेते हुए गांव की प्राकृतिक संपदाओं और जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने की सामूहिक शपथ ली।
न्यायपूर्ण बदलाव और पर्यावरण संरक्षण के लिए जुटे 43 संगठन
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लोक स्वर की सचिव शालिनी समवेदना ने सारथी नेटवर्क के उद्देश्यों को साझा करते हुए बताया कि ‘सारथी’ झारखंड के विभिन्न जिलों में सक्रिय 43 सामाजिक संगठनों का एक मजबूत और साझा नेटवर्क है। यह नेटवर्क राज्य में न्यायपूर्ण बदलाव, पर्यावरण संरक्षण और समुदाय आधारित विकास के लिए लगातार जमीनी काम कर रहा है।
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अन्य वक्ताओं के विचार: लोक स्वर के समन्वयक गुंजन बेदिया, फील्ड कोऑर्डिनेटर सुमन सनीचरेया, बिट्टू, महिला समूह की सदस्य हीरा देवी, प्रियंका, सुमितरा देवी और स्थानीय सरकारी स्कूल के शिक्षक दिनेश ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने चेताया कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी का सबसे सीधा व बुरा असर ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी पर पड़ रहा है, इसलिए ग्रामीणों को खुद संगठित होकर अपनी जमीन और जंगलों को बचाना होगा।
