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Saturday, May 2, 2026

संकट में झारखंड का पत्थर उद्योग: वन सीमा नियमों के कारण 70% क्रशर इकाइयां बंद होने की कगार पर

राँची: झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के माइनर मिनरल्स उप-समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आज चैंबर भवन में आयोजित की गई। इस बैठक में राज्यभर के खनन पट्टाधारी और क्रशर व्यवसायी जुटे, जिन्होंने वन सीमा से दूरी के नए नियमों के कारण उद्योग पर आए गंभीर संकट पर अपनी चिंता व्यक्त की।


क्या है मुख्य विवाद?

बैठक में माननीय उच्च न्यायालय में दायर पीआईएल (PIL) सं. 3950/2024 के आलोक में आए आदेश पर विस्तृत चर्चा हुई। इस आदेश के तहत:

  • खनन पट्टों की वन सीमा से दूरी 400 मीटर तय की गई है।

  • क्रशर इकाइयों की दूरी 500 मीटर निर्धारित की गई है।

व्यवसायियों का कहना है कि इस निर्णय के बाद राज्य की अधिकांश इकाइयों के ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (CTO) पर रोक लग गई है, जिससे पूरा पत्थर उद्योग ठप होने की स्थिति में है।

व्यवसायियों की दलील: निवेश और रोजगार पर खतरा

उप-समिति के चेयरमैन नितेश सारदा ने बताया कि वर्ष 2015 से पहले यह दूरी 500 मीटर थी, जिसे सरकार ने घटाकर 250 मीटर कर दिया था। इसी 250 मीटर के मानक को आधार मानकर हजारों व्यवसायियों ने:

  • करोड़ों रुपये का निवेश किया और बैंकों से भारी ऋण लिया।

  • पर्यावरण और संचालन की सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त कीं।

अचानक नियमों के कड़े होने से न केवल उद्यमियों के सामने दिवालिया होने का खतरा है, बल्कि इस क्षेत्र से जुड़े हजारों मजदूरों की आजीविका भी दांव पर लग गई है।

आम जनता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा असर

बैठक में यह अंदेशा जताया गया कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही, तो राज्य की 60% से 70% पत्थर खदानें और क्रशर इकाइयां बंद हो जाएंगी। इसके परिणाम स्वरूप:

  1. राज्य में गिट्टी की भारी किल्लत हो जाएगी।

  2. बालू की तरह गिट्टी के दाम भी आसमान छुएंगे।

  3. सरकार के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (सड़क, पुल आदि) की गति धीमी हो जाएगी।

पड़ोसी राज्यों की तुलना में झारखंड के नियम अधिक कठोर

व्यवसायियों ने तुलनात्मक डेटा पेश करते हुए बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में यह दूरी मात्र 200 से 250 मीटर है। यहाँ तक कि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जनवरी 2025 में प्रकाशित गजट में भी दूरी का मानक 250 मीटर ही रखा गया है।

चैंबर का आश्वासन और अगली रणनीति

खनन पट्टाधारी संघ के अनिल सिंह और पंकज सिंह ने सरकार से नियमों में संशोधन की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही माननीय मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री और उच्चाधिकारियों से मिलकर इस समस्या का समाधान निकालेंगे।


बैठक में प्रमुख उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण बैठक में आदित्य मल्होत्रा, प्रवीण लोहिया, रोहित अग्रवाल, नितेश सारदा, डॉ. अनल कुमार सिन्हा सहित पलामू, धनबाद, हजारीबाग, बोकारो, कोडरमा, साहिबगंज और जमशेदपुर के दर्जनों प्रमुख व्यवसायी उपस्थित थे।

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