रायपुर । छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में फर्जी नामांकन (Ghost Students) का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आधार लिंकिंग और डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया के बाद स्कूलों से 10 लाख से अधिक ऐसे विद्यार्थियों के नाम कट गए हैं, जो सिर्फ कागजों पर मौजूद थे।
आधार लिंकिंग ने खोली पोल
पहले स्कूलों में केवल कुल संख्या दर्ज कर दी जाती थी, जिससे फर्जी नाम जोड़ना आसान था। लेकिन शिक्षा विभाग ने जैसे ही यू-डाइस (U-DISE) पोर्टल पर विद्यार्थियों के नाम के साथ आधार और मोबाइल नंबर अनिवार्य किया, फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं। पोर्टल ने उन नामों को रिजेक्ट कर दिया जिनका आधार फर्जी था या जो पहले से कहीं और पंजीकृत थे।
फर्जीवाड़े का गणित: करोड़ों का वारा-न्यारा
इस डिजिटल सफाई के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
नामांकन में गिरावट: वर्ष 2024 में 53.69 लाख छात्रों को किताबें बांटी गई थीं, जो 2026 में घटकर महज 43 लाख रह गई हैं।
किताबों की बचत: अब सालाना लगभग 50 लाख किताबें कम छापनी होंगी।
आर्थिक नुकसान: अनुमान है कि पिछले चार वर्षों में करीब 25 लाख अतिरिक्त छात्रों के नाम पर किताबें छपीं, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 62.50 करोड़ रुपये का चूना लगा।
योजनाओं में सेंध: इन ‘भूतिया छात्रों’ के नाम पर न केवल किताबें, बल्कि मध्याह्न भोजन (Mid-day Meal), यूनिफॉर्म और साइकिल वितरण का बजट भी डकारा जा रहा था।
जिलों में अनियमितताओं का अंबार
सिर्फ नामांकन ही नहीं, विभाग के अन्य स्तरों पर भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी मिली हैं:
कवर्धा: बीईओ (BEO) कार्यालय में बिना किसी रजिस्टर के 218 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा मिला।
दुर्ग व रायपुर: स्वामी आत्मानंद स्कूलों में जिला शिक्षा अधिकारी के फर्जी डिजिटल साइन वाले ज्वॉइनिंग लेटर बांटकर अवैध नियुक्तियां की गईं।
बिलासपुर व मुंगेली: यहाँ कई स्कूलों द्वारा गलत मान्यता दिखाकर फंड डकारने की जांच जारी है।
निजी स्कूलों पर गाज: रायपुर के द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल और विकॉन स्कूल जैसे संस्थानों पर ‘डमी स्टूडेंट्स’ के मामले में सीबीएसई ने कार्रवाई की है।
कड़ा एक्शन: 10 बड़े अधिकारी निलंबित
सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रायपुर और सरगुजा संभाग के 3 संयुक्त संचालकों सहित लगभग 10 उच्च अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। पाठ्यपुस्तक निगम के एमडी राजेंद्र कटारा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है।
पारदर्शिता की ओर कदम
शिक्षा विभाग के सचिव ने स्पष्ट किया है कि आधार लिंकिंग से सिस्टम को पारदर्शी बनाया जा रहा है। अब एक-एक छात्र का डिजिटल हिसाब होगा, जिससे सालाना करोड़ों रुपये के सरकारी बजट की बचत होगी। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या स्कूल संचालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

