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Wednesday, April 29, 2026

साकची गोलचक्कर पर मनाई गई दानवीर भामाशाह की जयंती, भीषण गर्मी में राहगीरों को मिला चना-गुड़ और ठंडा पानी

जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) । लौहनगरी जमशेदपुर में बुधवार को महा दानवीर भामाशाह की जयंती बड़े ही श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाई गई। साकची गोलचक्कर पर आयोजित इस कार्यक्रम में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से जूझ रहे राहगीरों की सेवा कर उन्हें भामाशाह के आदर्शों की याद दिलाई गई।

सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि: राहगीरों को दी राहत
शहर में पड़ रही अत्यधिक गर्मी को देखते हुए स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सराहनीय पहल की। साकची जैसे व्यस्त इलाके में राहगीरों और वाहन चालकों के बीच चना-गुड़ और ठंडे पानी का वितरण किया गया। चिलचिलाती धूप में इस जल सेवा और जलपान से लोगों को काफी राहत मिली। राहगीरों ने आयोजकों के इस निस्वार्थ प्रयास की जमकर सराहना की।

त्याग और समर्पण के प्रतीक हैं भामाशाह
कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे मोहन साव और मनोज गुप्ता ने भामाशाह के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा “भामाशाह केवल एक नाम नहीं, बल्कि त्याग और दानशीलता की पराकाष्ठा हैं। जब महाराणा प्रताप हल्दीघाटी युद्ध के बाद आर्थिक संकट से गुजर रहे थे, तब भामाशाह ने अपनी जीवन भर की पूंजी उन्हें सौंप दी थी। आज उनकी जयंती पर भूखे-प्यासे लोगों की सेवा करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।”

इतिहास का वो महान दान
आयोजकों ने बताया कि इतिहास के अनुसार, भामाशाह ने मेवाड़ की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप को लगभग 25 लाख रुपये और विशाल स्वर्ण भंडार भेंट किया था। इसी सहयोग के बल पर महाराणा प्रताप ने अपनी सेना को फिर से संगठित किया और मातृभूमि की रक्षा की। इसी महान योगदान के कारण उन्हें भारतीय इतिहास में ‘महा दानवीर’ का दर्जा प्राप्त है।

भविष्य में भी जारी रहेगी सेवा
कार्यक्रम में स्थानीय दुकानदारों और बड़ी संख्या में समाजसेवियों ने हिस्सा लिया। आयोजकों ने संकल्प लिया कि आने वाले दिनों में भी गर्मी के प्रकोप को देखते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों में जल सेवा और खाद्य वितरण अभियान जारी रखा जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने भामाशाह के जीवन मूल्यों को अपनाने की शपथ ली।

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