मुंबई । रिलायंस इंडस्ट्रीज के ताजा वित्तीय नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जियो अब केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल और AI अर्थव्यवस्था का मुख्य द्वार बनने जा रहा है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कंपनी के भविष्य के रोडमैप को ‘इंटेलिजेंस एरा’ (AI युग) से जोड़ते हुए एक नई दिशा दी है।
कनेक्टिविटी से ‘इंटेलिजेंस’ तक का सफर
आकाश अंबानी के अनुसार, जिस तरह जियो ने भारत को इंटरनेट क्रांति से जोड़ा, अब वही नेटवर्क देश को AI युग में ले जाएगा। उन्होंने कहा: “52 करोड़ 40 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ जियो अब ‘इंटेलिजेंस एरा’ का डिजिटल गेटवे बनने के लिए तैयार है। हमारा एडवांस कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर AI सेवाओं को हर घर और व्यवसाय तक पहुंचाएगा।”
प्रमुख आंकड़े: जियो की डिजिटल ताकत (मार्च 2026 तक)
जियो का विस्तार केवल मोबाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि फिक्स्ड ब्रॉडबैंड और होम कनेक्टिविटी में भी इसकी पकड़ मजबूत हुई है:
| कैटेगरी | आंकड़े |
| कुल यूजर बेस | 52.4 करोड़ |
| मार्केट शेयर (ब्रॉडबैंड) | ~43% |
| जियोफाइबर यूजर्स | 2.71 करोड़ |
| जियोएयरफाइबर यूजर्स | 1.30 करोड़ |
| प्रति व्यक्ति डेटा खपत | 42.3 GB / महीना |
डेटा की बढ़ती भूख: AI के लिए मजबूत बुनियाद
जियो नेटवर्क पर डेटा ट्रैफिक में सालाना 35% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। प्रति व्यक्ति 42.3 GB की मासिक खपत यह दर्शाती है कि भारतीय उपभोक्ता अब हाई-स्पीड डिजिटल सेवाओं के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यही बढ़ता डेटा उपयोग भविष्य में AI आधारित सेवाओं (जैसे स्मार्ट होम, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑटोमेशन) के लिए एक ठोस आधार तैयार करेगा।
शानदार वित्तीय प्रदर्शन
डिजिटल सेवाओं की इस ग्रोथ का सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर भी दिख रहा है:
Q4 FY26 रेवेन्यू: 44,928 करोड़ रुपये (12.7% की वृद्धि)
EBITDA: 20,060 करोड़ रुपये
मार्जिन: 52% से अधिक
जियो का मॉडल अब केवल कॉल और डेटा देने तक सीमित नहीं है। 5G नेटवर्क, जियोएयरफाइबर का विस्तार और विशाल यूजर बेस मिलकर एक ऐसा ईकोसिस्टम बना रहे हैं, जो आने वाले समय में भारत की AI इकोनॉमी की रीढ़ साबित होगा।

