नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे ईंधन और खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह विफल करार दिया है। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ‘सीमांकन’ (Delimitation) जैसे मुद्दों का सहारा लेकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन देश अब इस हकीकत को समझ चुका है।
ईंधन संकट: गिरता उत्पादन और कालाबाजारी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आंकड़ों के साथ प्रहार करते हुए खरगे ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र की बदहाली का जिक्र किया। देश में कच्चे तेल का उत्पादन लगातार 11वें साल गिरा है। 2014-15 के मुकाबले अब तक उत्पादन में 22% की भारी कमी आई है। गैस के उत्पादन में भी करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है। खरगे ने दावा किया कि ग्रामीण इलाकों में एलपीजी कनेक्शन बंद हो रहे हैं और लोग सिलेंडर के लिए लंबी वेटिंग और कालाबाजारी झेलने को मजबूर हैं।
समुद्री मार्ग में फंसे भारतीय जहाज
खरगे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सुरक्षा साख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पा रहा है। पिछले 54 दिनों से 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज वहां फंसे हुए हैं, जो सरकार की कूटनीतिक विफलता को दर्शाता है।
खाद संकट: किसानों की बढ़ी मुश्किलें
खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र पर चिंता जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश का खाद उत्पादन मार्च 2026 में 5 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। खाद उत्पादन में 24.6% की भारी कमी आई है। रूस और चीन द्वारा निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद मोदी सरकार ने आयात के अन्य विकल्पों (Diversification) पर ध्यान नहीं दिया। सरकार की इसी उदासीनता के कारण देश भर के किसानों को खाद की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
खरगे ने स्पष्ट किया कि चाहे वह ऊर्जा का क्षेत्र हो या खेती-किसानी, हर जगह मोदी सरकार की नीतियां विफल साबित हुई हैं और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

