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Wednesday, April 22, 2026

पृथ्वी दिवस पर पीएम मोदी का संदेश: ‘धरती माता’ का संरक्षण हमारा पवित्र संकल्प, साझा किया संस्कृत श्लोक

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ (World Earth Day) के अवसर पर प्रकृति के संरक्षण को मानवता के कल्याण के लिए अनिवार्य बताया है। उन्होंने पृथ्वी को ‘माता’ के समान पूजनीय बताते हुए कहा कि इसकी रक्षा करना न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक पवित्र संकल्प भी है।

संस्कृत सुभाषित से दिया प्रकृति प्रेम का संदेश
प्रधानमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया (X) पर एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसके माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संतुलन का गहरा अर्थ समझाया: “यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा। पृथिवीं धेनुं प्रदुहां न उदिच्छन्तु नमोऽस्तु पृथिव्यै॥”

दोहन करें, लेकिन अहित नहीं
इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस पृथ्वी पर वृक्ष और वनस्पतियां अडिग रूप से स्थित हैं और जो पूरे विश्व का पोषण करती है, वह किसी ‘कामधेनु’ (गाय) से कम नहीं है। हमें धेनु के समान पृथ्वी का उपयोग तो करना चाहिए, लेकिन उसका अहित या विनाश बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

संतुलित जीवनशैली पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुदाय से पृथ्वी के संसाधनों के संतुलित और सस्टेनेबल (स्थायी) उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने संदेश दिया कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन ही उज्ज्वल भविष्य की नींव है।

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