पटना | बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही प्रशासनिक अमला पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। शुक्रवार सुबह पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर प्रदेश की तमाम बड़ी जेलों में एक साथ सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया गया। इस अचानक हुई कार्रवाई से जेल प्रशासन और कैदियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
मुजफ्फरपुर: भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे डीएम-एसएसपी
उत्तर बिहार की सबसे महत्वपूर्ण शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में तड़के 4:30 बजे जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में छापेमारी शुरू हुई। दर्जनों थानों की पुलिस ने पूरे परिसर को घेर लिया और एक-एक वार्ड की बारीकी से तलाशी ली। हालांकि, घंटों चली इस मशक्कत के बाद एसएसपी ने पुष्टि की कि जेल के भीतर से कोई भी आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई है।
सीतामढ़ी में मिले संदिग्ध दस्तावेज
जहाँ अधिकांश जेलों में पुलिस के हाथ खाली रहे, वहीं सीतामढ़ी जेल से बड़ी खबर सामने आई। छापेमारी के दौरान एक वार्ड से कुछ संदिग्ध कागजात मिले हैं, जिनमें कई मोबाइल नंबर और आपत्तिजनक बातें लिखी थीं। इस बरामदगी के बाद प्रशासन ने कुख्यात अपराधियों को केंद्रीय कारागार में शिफ्ट करने के संकेत दिए हैं।
इन जिलों में भी रही प्रशासन की सख्ती
सीवान: डीएम विवेक रंजन मैत्रेय और एसपी पूरन कुमार झा के नेतृत्व में करीब एक घंटे तक रेड चली।
भोजपुर: सुबह 4 बजे से 6 बजे तक डीएम तन्य सुल्तानिया और एसपी राज ने जेल का चप्पा-चप्पा खंगाला।
बक्सर और वैशाली: यहाँ भी जिलाधिकारियों के नेतृत्व में 2 से ढाई घंटे तक सघन तलाशी ली गई।
भागलपुर: शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा में डीएम और एसएसपी ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
प्रशासन का संदेश: बिहार में हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तुरंत बाद हुई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि नई सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त है। अपराधियों के मनोबल को तोड़ने के लिए जेलों के भीतर इस तरह की निगरानी अब और तेज की जाएगी।

