नई दिल्ली । केंद्र सरकार आज संसद के विशेष सत्र में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़े बदलाव लाने वाले तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनावों से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को प्रभावी बनाना और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को गति देना है।
कौन से विधेयक होंगे पेश?
संसद के पटल पर आज तीन मुख्य विधायी प्रस्ताव रखे जाएंगे:
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: यह सबसे महत्वपूर्ण है, जो आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को सक्रिय करेगा।
परिसीमन विधेयक, 2026: सीटों के पुनर्निर्धारण की रूपरेखा तय करेगा।
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: केंद्र शासित प्रदेशों में विधायी बदलावों से संबंधित।
सीटों का गणित: लोकसभा में बढ़ेंगी सीटें
नए परिसीमन के साथ ही लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा:
अधिकतम सीमा: लोकसभा में सीटों की अधिकतम संख्या 850 तय की गई है (वर्तमान में 543 सीटें हैं)।
सीटों में बढ़ोत्तरी: सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर राज्य की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
विवाद का समाधान: दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों में कटौती की आशंकाओं को खारिज करते हुए सरकार ने कहा है कि किसी भी राज्य की सीटें घटेंगी नहीं।
परिसीमन का आधार और प्रक्रिया
जनगणना आधार: परिसीमन की प्रक्रिया आखिरी प्रकाशित जनगणना यानी 2011 के आंकड़ों पर आधारित होगी।
राज्य आयोग: हर राज्य के लिए एक अलग ‘परिसीमन आयोग’ बनेगा, जो स्थानीय राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद ही सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा।
तर्क: सरकार का कहना है कि 1976 के बाद से सीटों में बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए नया परिसीमन समय की मांग है।
संसद का शेड्यूल: 3 दिन का विशेष सत्र
16 अप्रैल: लोकसभा में तीनों विधेयकों पर 18 घंटे की लंबी चर्चा शुरू होगी।
17 अप्रैल: चर्चा के बाद लोकसभा में मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
18 अप्रैल: लोकसभा से पास होने के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहाँ 10 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग होगी।

