झारखंड ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य का मातृ मृत्यु दर (MMR) घटकर 54 (प्रति एक लाख प्रसव) पर आ गया है, जो राष्ट्रीय औसत (88) से काफी बेहतर है। झारखंड ने 2030 तक के सतत विकास लक्ष्य (SDG) को समय से पहले ही प्राप्त कर लिया है।
चिंता का विषय: हर साल 540 मौतें
आंकड़ों में सुधार के बावजूद वास्तविकता यह है कि राज्य में हर साल लगभग 10 लाख प्रसव होते हैं, जिनमें से 500 से 540 महिलाओं की मौत प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अब इस आंकड़े को ‘शून्य’ तक ले जाना है।
बजट की कमी और लंबित भुगतान (JSY)
सुरक्षित मातृत्व के लिए चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना (JSY) वर्तमान में फंड की कमी से जूझ रही है।
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लंबित मामले: राज्य भर में 1 लाख 13 हजार से अधिक माताएं अपनी प्रोत्साहन राशि का इंतजार कर रही हैं।
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रांची का हाल: अकेले रांची सदर अस्पताल में 885 माताओं का भुगतान बकाया है।
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प्रभाव: विशेषज्ञों का मानना है कि भुगतान में देरी से सरकारी अस्पतालों में प्रसव (Institutional Delivery) कराने के प्रति महिलाओं का भरोसा कम हो सकता है।
नई पहल: हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मॉड्यूल
राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने यूनिसेफ (UNICEF) के साथ मिलकर ‘हाई रिस्क प्रेग्नेंसी आइडेंटिफिकेशन एंड मैनेजमेंट मॉड्यूल’ लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित करना है।

