जमशेदपुर: जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक पूर्णिमा साहू ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया है। उनका कहना है कि इस अधिनियम के जरिए महिलाएं अब केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगी, जिससे देश का लोकतांत्रिक ढांचा पहले से अधिक मजबूत और संतुलित होगा। सर्किट हाउस, बिस्टुपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक पूर्णिमा साहू ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि सितंबर 2023 में पारित किए गए इस संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई यानी 33% सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। यह आरक्षण अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को एक लाभार्थी से नीति निर्माता बनने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे शासन की प्राथमिकताओं में बदलाव आएगा। इस बदलाव के तहत पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे बुनियादी मुद्दों को अधिक प्राधान्यता मिलेगी, और साथ ही उत्तरदायित्व में भी वृद्धि होगी। विधायक ने यह भी कहा कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी न केवल सामाजिक संतुलन लाएगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मददगार साबित होगी। उन्होंने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि यदि लिंग आधारित अंतर को कम किया जाए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि संभव है। वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 2024 तक कुल मतदाताओं में महिलाओं की संख्या 48.62% होगी और इनमें से 65.78% महिलाओं ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया है, जो कई क्षेत्रों में पुरुष मतदाताओं से अधिक है। बावजूद इसके, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है। उदाहरण के तौर पर, 1952 में लोकसभा में केवल 22 महिला सदस्य थीं, जो 2024 में बढ़कर 75 तक पहुंचीं। राज्यसभा में यह आंकड़ा करीब 17% है। वहीं, ग्राम पंचायतों में सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए 46% महिला प्रतिनिधित्व और करीब साढ़े 14 लाख महिला जनप्रतिनिधियों ने यह साबित कर दिखाया कि अवसर मिलने पर वे उत्कृष्ट शासन देकर समाज की प्रगति में योगदान दे सकती हैं। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए इस अधिनियम को “नए भारत की आधारशिला“ करार दिया। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवर्तनकारी कदम है जो महिलाओं को निर्णय लेने की ताकत देगा और उनका वास्तविक सशक्तिकरण सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि अब वक्त ऐसा आ चुका है कि महिलाओं को अपने हक की लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने इसे केवल राजनीति के चश्मे से ना देखकर महिलाओं के सशक्तिकरण और संतुलित विकास के नजरिए से देखने की अपील की। उनका मानना है कि यह अधिनियम भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य—भारत-2047—को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान झारखंड महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष कल्याणी शरण, पोटका की पूर्व विधायक मेनका सरकार, भाजपा महानगर महिला मोर्चा की अध्यक्ष नीलू मछुआ और अन्य प्रमुख नेता भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। हालांकि, इसे लेकर चर्चा है कि इसे 2029 के चुनावों से पहले लागू करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। यह कानून महिलाओं को राजनीति में एक सुदृढ़ स्थान देने और उनकी आवाज को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

