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Saturday, April 11, 2026

I.N.D.I.A. गठबंधन की बड़ी बैठक 15 अप्रैल को: महिला आरक्षण बिल और डीलिमिटेशन पर केंद्र को घेरने की तैयारी

नई दिल्ली | 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से ठीक पहले विपक्षी दलों का I.N.D.I.A. गठबंधन अपनी रणनीति धारदार करने में जुट गया है। आगामी 15 अप्रैल को गठबंधन के प्रमुख नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलावों पर साझा रुख तय करना है।

स्पेशल सेशन और विपक्ष का शक
केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। हालांकि, देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच अचानक बुलाए गए इस सत्र ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। विपक्ष को अंदेशा है कि चुनावी फायदा: सरकार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों में लाभ लेने के लिए बिल में कुछ ‘चुपके’ से बदलाव कर सकती है। चर्चा है कि सीटों के परिसीमन (डीलिमिटेशन) को लेकर सरकार नया रुख अपना सकती है, जिससे लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती है।

कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का कड़ा रुख
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने पहले ही इस मुद्दे पर चर्चा की है। कांग्रेस का मानना है कि केंद्र सरकार पश्चिम एशियाई संकट और विदेश नीति की विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए जल्दबाजी में यह सत्र लाई है।

सांसद मोहम्मद जावेद (कांग्रेस): “गठबंधन राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर एकजुट है। कांग्रेस ने ही सबसे पहले स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया था।”

जावेद अली खान (सपा): “सरकार जनगणना और आरक्षण को अलग करने की कोशिश कर रही है। अगर लागू 2029 में करना है, तो इतनी जल्दबाजी क्यों?”

कीर्ति आजाद (TMC): “बीजेपी बंगाल में सफल नहीं होगी। हमारी पार्टी ने पहले ही महिलाओं को लगभग 37% प्रतिनिधित्व दिया है।”

प्रमुख मुद्दे जिन पर होगी चर्चा:
आचार संहिता का उल्लंघन: विपक्ष का तर्क है कि चुनाव के बीच कानून में बदलाव लाना मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ है।

जनगणना में देरी: 2021 की जनगणना अब तक क्यों नहीं हुई, इस पर विपक्ष सरकार को घेरेगा।

डीलिमिटेशन का फॉर्मूला: क्या सरकार सभी सीटों पर 50% की बढ़ोतरी करने जा रही है? इस अनपुष्ट खबर ने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है।

नतीजा: 15 अप्रैल की बैठक के बाद यह साफ हो जाएगा कि विपक्ष संसद के भीतर सरकार के प्रस्तावित संशोधनों का किस तरह मुकाबला करेगा। गठबंधन का मानना है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाना जरूरी था, जिसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया।

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