तेहरान/इस्लामाबाद । पश्चिम एशिया में हफ्तों से जारी भीषण सैन्य संघर्ष और तनाव के बीच आज पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं। करीब 11 साल के लंबे अंतराल के बाद अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल सीधे बातचीत की मेज पर बैठने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक शांति वार्ता के लिए दोनों देशों के हाई-प्रोफाइल नेता इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं।
ट्रंप के करीबी और ईरानी दिग्गज आमने-सामने
इस वार्ता की गंभीरता का अंदाजा इसमें शामिल होने वाले चेहरों से लगाया जा सकता है:
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल: इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल: ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर घालीबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेममती नेतृत्व कर रहे हैं।
वार्ता के मुख्य मुद्दे और चुनौतियां
पश्चिम एशिया में इजराइल-हिज्बुल्ला संघर्ष और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर जारी विवाद इस बैठक के केंद्र में रहेंगे। जहाँ ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है, वहीं वार्ता शुरू होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है।
दुनिया की उम्मीदें और डर
जानकारों का मानना है कि यह बैठक न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा तय करेगी, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होगी। 11 साल बाद हो रही यह सीधी बातचीत तनाव कम करने का आखिरी मौका मानी जा रही है।

