नई दिल्ली | भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने 2026 के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के मद्देनजर मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दिन सभी सरकारी, निजी और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को सवेतन अवकाश (Paid Holiday) दिया जाएगा।
यह आदेश न केवल स्थायी कर्मचारियों, बल्कि दैनिक वेतनभोगी (Daily Wagers) और आकस्मिक श्रमिकों (Casual Workers) पर भी समान रूप से लागू होगा।
विभिन्न राज्यों में मतदान की तिथियां
आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में मतदान निम्नलिखित तिथियों पर होगा:
09 अप्रैल: असम, केरल, पुडुचेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा।
23 अप्रैल: तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र।
पश्चिम बंगाल (दो चरण): प्रथम चरण 23 अप्रैल और द्वितीय चरण 29 अप्रैल को।
नियमों का उल्लंघन करने पर लगेगा जुर्माना
चुनाव आयोग ने सख्त लहजे में कहा है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के तहत मतदान के दिन सवेतन अवकाश देना अनिवार्य है।
“प्रत्येक व्यक्ति जो किसी भी व्यवसाय, उद्योग या किसी अन्य प्रतिष्ठान में कार्यरत है और विधानसभा चुनाव में मतदान करने का हकदार है, उसे मतदान के दिन अवकाश दिया जाएगा। इस छुट्टी के बदले उनके वेतन से कोई कटौती नहीं की जा सकती।”
यदि कोई नियोक्ता या कंपनी इस नियम का उल्लंघन करती है और कर्मचारी को वोट देने के लिए सवेतन अवकाश देने से मना करती है, तो संबंधित नियोक्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा।
बाहर काम करने वाले मतदाताओं को भी राहत
आयोग ने उन मतदाताओं के लिए भी स्थिति स्पष्ट की है जो अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर किसी अन्य जिले या स्थान पर कार्यरत हैं। उन्हें भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए सवेतन अवकाश प्रदान किया जाएगा, ताकि दूरी या काम का बोझ उनके लोकतांत्रिक अधिकार में बाधा न बने।
राज्यों को सख्त निगरानी के निर्देश
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन प्रावधानों का जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इसका मुख्य उद्देश्य मतदान प्रतिशत को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी नागरिक रोजगार के कारण अपने वोट से वंचित न रहे।