हरिद्वार। नए शैक्षणिक सत्र से पूर्व शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों पर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने ऐसे स्कूलों को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो एनसीईआरटी की पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशनों की महंगी किताबें लागू कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और गैर-सरकारी सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू हैं, लेकिन कई निजी विद्यालय नियमों की अनदेखी करते हुए निजी प्रकाशकों की किताबें लगाते हैं और अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। इस बार विभाग ने इस तरह की मनमानी पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार आर्य ने बताया कि लक्सर क्षेत्र में ऐसे निजी विद्यालयों को चिन्हित किया जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यालय द्वारा निजी प्रकाशन की किताबें लगाने या अभिभावकों पर मनमानी फीस, ड्रेस और किताबों का दबाव बनाने वाले विद्यालय की मान्यता रद्द करने की संस्तुति उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि यदि किसी स्कूल द्वारा एनसीईआरटी की जगह निजी किताबें लगाने या निर्धारित दुकान से सामान खरीदने का दबाव बनाया जाता है, तो इसकी शिकायत तुरंत शिक्षा विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।


