रामगढ़ : जिले के गोला प्रखंड स्थित अपने पैतृक गांव नेमरा में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार देर शाम परिवार के संग पहुंचकर गुरुवार को बाहा पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक विधियों से पूजा-अर्चना की और ग्रामीण समुदाय के रीति-रिवाजों में भाग लिया।
चैत्र माह की शुरुआत से पहले मनाया जाने वाला बाहा पर्व संथाली समाज के लिए खास महत्व रखता है। इस अवसर पर गांव के जाहेर थान में देवताओं के लिए पुआल का प्रतीकात्मक घर बनाया गया, जहां आम और महुआ के फूल अर्पित कर परंपरागत पूजा की गई। मुख्यमंत्री बुधवार को सड़क मार्ग से नेमरा पहुंचे और रात में वहीं रुककर गुरुवार को पूरे गांव का भ्रमण किया। साथ ही उन्होंने कृषि व अन्य विषयों पर ग्रामीणों और जिला अधिकारियों से चर्चा की और आवश्यक निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर ढोल-नगाड़ों की धुन पर गांव के चैतन्य (पाहन) और अन्य ग्रामीणों के साथ लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर सरना स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने संथाली रीति–रिवाजों के अनुसार बाहा पूजा और कुलदेवता की आराधना की। समाज के मांझी हड़ाम होने की वजह से मुख्यमंत्री हर वर्ष यह पूजा करने नेमरा आते हैं। इस बार भी उन्होंने कुलदेवता की पूजा–अर्चना कर परंपरा निभाई।
बाहा पूजा के इस मौके पर मुख्यमंत्री की माता रूपी सोरेन, पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, दुमका विधायक बसंत सोरेन, पूर्व विधायक सीता सोरेन सहित परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। सभी ने सामूहिक रूप से इस परंपरागत पूजा में भाग लिया और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। साथ ही गांव के संथाली समाज और पुजारियों ने भी राज्य की शांति और कल्याण के लिए कामना की।

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने विशेष तैयारियां की थीं। रामगढ़ के उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज, पुलिस अधीक्षक अजय कुमार और अनुमंडल पदाधिकारी समेत अनेक अधिकारी और पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद थे। कार्यक्रम को देखते हुए गांव और आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया गया था, साथ ही मार्गों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी की गई। मुख्यमंत्री की उपस्थिति से नेमरा गांव में उत्साहपूर्ण माहौल बन गया और पारंपरिक संस्कृति तथा आदिवासी विरासत को संजोने का संदेश अधिक स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया।

अपने संबोधन में उन्होंने झारखंड और देश की जनता को बाहा पर्व की शुभकामनाएं देते हुए परंपराओं को बनाए रखने का आह्वान किया। इसके अलावा, खाड़ी देशों में फंसे झारखंड के नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार से सहयोग का अनुरोध करने की जानकारी भी दी। कार्यक्रम सम्पन्न होते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची वापस लौट गए।


