- सिमडेगा में शोक का माहौल, इकलौते बेटे के बिछड़ने से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सिमडेगा | सोमवार की सुबह 24 वर्षीय ध्रुव कुमार अपने घर से निकले, यह जाने बिना कि वह अपनी मां के हाथ का बना खाना या पिता की आवाज़ फिर कभी नहीं सुन पाएंगे। अपने मामा, जो उपचाराधीन थे, को देखने रांची जाने वाले इस होनहार नौजवान की जिंदगी उस शाम चतरा के सिमरिया में हुए एयर एंबुलेंस हादसे में खत्म हो गई। इस क्रैश में ध्रुव समेत सात लोगों की जान चली गई। जब यह खबर सिमडेगा पहुंची, तो पूरे क्षेत्र में शोक और गम की लहर दौड़ गई।
ध्रुव के मामा संजय कुमार, जो चंदवा में छोटा मोटा व्यवसाय चलाते थे, कुछ दिनों पहले एक बड़े हादसे में झुलस गए थे और उनके 80 प्रतिशत शरीर पर गहरी चोटें आई थीं। उनका इलाज रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था। स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की सलाह दी थी। मामा की देखभाल और सहायता करने के लिए ध्रुव सोमवार को अपने घर से रवाना हुए थे।
इकलौते बेटे की मौत से टूटा परिवार
ध्रुव अपने माता-पिता का इकलौता सहारा थे। उनके पिता राशन दुकान में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। जैसे ही देर रात यह हादसे की खबर उनके घर पहुंची, परिवार और पड़ोस में कोहराम मच गया। मंगलवार सुबह तक यह दु:खद खबर पूरे जिले में फैल गई। ध्रुव की मिलनसारिता, शांत स्वभाव और अपने परिवार के प्रति समर्पण को याद करते हुए हर कोई दुःख व्यक्त कर रहा है। लोग लगातार उसके घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधाने में लगे हुए हैं।
कंधों पर जिम्मेदारी लेने से पहले ही दुनिया से कहा अलविदा
ध्रुव अपने परिवार का आर्थिक सहारा बनना चाहता था। वह रोजगार पाने की कोशिश कर रहा था और अपने परिवार की माली हालत सुधारने हेतु मेहनत कर रहा था। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनकर भी उसने परिवार की मदद करने के लिए काफी मेहनत की, लेकिन किस्मत ने उसके सपनों को हकीकत बनने से पहले ही छीन लिया।


