पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 71 साल के थे। पिता की मौत के बाद बेटे सुभ्रांशु ने बताया कि वे पार्किंसंस रोग सहित कई बीमारियों से पीड़ित थे और उनकी तीन सर्जरी हो चुकी थीं। सुभ्रांशु ने आगे बताया कि वे दो साल से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहे और कोमा में थे। उनके करीबी सहयोगियों के अनुसार, वे कई स्वास्थ्य समस्याओं के कारण काफी समय से इलाज करा रहे थे, लेकिन इलाज का उन पर कोई असर नहीं पड़ रहा था।
साल 2006 में वे राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 और 2012 तक राज्यसभा में पार्टी के नेता रहे। मुकुल रॉय अपनी संगठन क्षमता के लिए जाने जाते थे और एक समय उन्हें बंगाल की राजनीति का चाणक्य कहा जाता था। 2010 के दशक में मुकुल रॉय के टीएमसी के साथ रिश्ते बिगड़ गए। खासकर शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मुद्दों के बाद वह टीएमसी से दूर हो गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन पर दुख जताया और कहा कि उन्हें उनके राजनीतिक अनुभव और समाज की सेवा करने की कोशिशों के लिए याद किया जाएगा। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन से दुख हुआ।


