नई दिल्ली। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत का तेजी से उभरता निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी और निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई गति दे रही है। प्रधानमंत्री ने नई तकनीक विकसित कर रही युवा पीढ़ी, विशेष रूप से जेनरेशन जेड के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार अपनी वैश्विक उपस्थिति मजबूत कर रहा है। उन्होंने अपने भाषणों का एक वीडियो भी साझा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या में उन्होंने बदलाव के एक नए चक्र की शुरुआत की बात कही थी और इस नए दौर में भारत वैश्विक व्यवस्था में अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है और इस लक्ष्य को हासिल करने में अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में देश की बढ़ती क्षमता भारत की व्यापक विकास यात्रा का अहम हिस्सा बन रही है।
प्रधानमंत्री ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की निजी अंतरिक्ष प्रतिभा ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी से देश के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिल रही है। इससे अंतरिक्ष तकनीक, नवाचार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की उपलब्धियां देश की अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों और युवाओं को प्रेरित कर रही हैं। अंतरिक्ष अभियानों की सफलता देखकर देश के अनेक बच्चे भविष्य में वैज्ञानिक और इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं। इससे विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ रही है।
इस अवसर पर इसरो अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने अहमदाबाद में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब देश ने अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत की थी, तब रॉकेट के पुर्जों को पुराने साइकिलों पर ले जाना पड़ता था। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह सफर आज कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थिति तक पहुंचा चुका है।
डॉ. नारायणन ने चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। हालांकि, इसकी सफलता केवल चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित उतरने तक सीमित नहीं रही। मिशन के दौरान बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए गए, जिन्हें दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपलब्ध कराया गया है।
इसरो अध्यक्ष ने कहा कि चंद्रयान-3 से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल दुनिया भर के वैज्ञानिक चंद्रमा से जुड़े शोध और नई खोजों के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मिशन की एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि इसने दुनिया भर में रह रहे 140 करोड़ भारतीयों को प्रेरित किया और देश में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर नई उम्मीद और उत्साह पैदा किया।
