नई दिल्ली । झारखंड आंदोलन के पुरोधा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और आदिवासी समाज की बुलंद आवाज रहे शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक भव्य नागरिक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया।
दिवंगत शिबू सोरेन की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति के हाथों यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रहण किया। इस गरिमामयी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित देश की कई बड़ी राजनीतिक और सामाजिक विभूतियां मौजूद रहीं।
झारखंड आंदोलन और आदिवासी अधिकारों के महानायक
शिबू सोरेन, जिन्हें झारखंड और देश भर में लोग आदरपूर्वक ‘दिशोम गुरु’ (देश के गुरु) कहकर पुकारते थे, का पूरा जीवन संघर्ष और जनसेवा को समर्पित रहा:
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अलग राज्य की लड़ाई: उन्होंने तत्कालीन बिहार से अलग कर एक नए झारखंड राज्य के गठन के आंदोलन का न केवल नेतृत्व किया, बल्कि उसे एक निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया।
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शोषितों की आवाज: उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए जलपाईगुड़ी आंदोलन से लेकर महाजनी प्रथा के खिलाफ आदिवासियों, दलितों और समाज के सबसे पिछड़े तबके के अधिकारों के लिए दशकों तक जमीनी लड़ाई लड़ी।
झारखंड की राजनीति के ध्रुव और प्रमुख नीति निर्धारक
राज्य निर्माण के बाद और उसके पहले भी भारतीय राजनीति में शिबू सोरेन का कद बेहद कद्दावर रहा:
राजनीतिक सफर: वे देश के कोयला मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे और इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग अवधियों में झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी राज्य की कमान संभाली। उनके द्वारा सिंचित किया गया दल ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ आज राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में से एक है।
झारखंड के जनमानस और समर्थकों के लिए गौरव का क्षण
दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत यह सर्वोच्च सम्मान मिलना पूरे झारखंड राज्य और आदिवासी समाज के लिए बेहद गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है। झामुमो नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनके करोड़ों समर्थकों ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सम्मान गुरु जी के लंबे त्याग, समर्पण और अमूल्य सामाजिक योगदान को राष्ट्र का एक सच्चा और ऐतिहासिक नमन है।
